अपराध कर बचना नामुमकिन: 11 साल पुराने गैंगस्टर केस में तीन दोषियों को तीन-तीन वर्ष की सजा
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Published - 12 June 2026 4 views
अपराध कर बचना नामुमकिन: 11 साल पुराने गैंगस्टर केस में तीन दोषियों को तीन-तीन वर्ष की सजा
नेशनल न्यूज 1 बांदा रिपोर्ट संध्या
बांदा। 11 वर्ष पुराने गैंगस्टर एक्ट के एक मामले में न्यायालय ने तीन अभियुक्तों को दोषी ठहराते हुए तीन-तीन वर्ष के कठोर कारावास और पांच-पांच हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई है। अर्थदंड जमा न करने की स्थिति में प्रत्येक दोषी को एक माह का अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतना होगा।
विशेष लोक अभियोजक गैंगस्टर एक्ट सौरभ सिंह ने बताया कि थाना बिसंडा में तत्कालीन थाना प्रभारी अमर सिंह द्वारा 14 जून 2014 को मु.अ.सं. 217/2014 के तहत उत्तर प्रदेश गिरोहबंद एवं समाज विरोधी क्रियाकलाप निवारण अधिनियम, 1986 की धारा 2/3 के अंतर्गत कुलदीप पुत्र दद्दू वर्मा निवासी जखनी थाना गिरवां, तैयब पुत्र अब्दुल रहमान निवासी बांदा तथा हसीबुद्दीन उर्फ पप्पू पुत्र समसुद्दीन निवासी दुबरिया पुरवा थाना बदौसा के विरुद्ध मुकदमा दर्ज कराया गया था।
अभियोजन के अनुसार कुलदीप गिरोह का सरगना था और अन्य अभियुक्त उसके सक्रिय सदस्य थे। सभी अभियुक्त संगठित तरीके से अपराध कर आर्थिक एवं भौतिक लाभ अर्जित करने के अभ्यस्त थे। इनके विरुद्ध दर्ज कई आपराधिक मामलों के आधार पर गैंग चार्ट तैयार कर सक्षम प्राधिकारी से अनुमोदन प्राप्त किया गया था।
मामले की विवेचना तत्कालीन निरीक्षक हरिशरण सिंह यादव द्वारा की गई। विवेचना के दौरान आपराधिक इतिहास, गैंग चार्ट, एफआईआर, सामान्य डायरी समेत अन्य दस्तावेजी साक्ष्यों का संकलन कर आरोप पत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया गया।
मुकदमे की सुनवाई के दौरान 25 जून 2015 को आरोप निर्धारित किए गए। अभियोजन पक्ष की ओर से छह गवाह प्रस्तुत किए गए तथा अभिलेखीय साक्ष्यों को न्यायालय में सिद्ध कराया गया। प्रभावी पैरवी और समयबद्ध साक्ष्य के आधार पर अपर सत्र न्यायाधीश एवं विशेष न्यायाधीश (गैंगस्टर एक्ट) बांदा, श्री पाल सिंह ने उपलब्ध मौखिक एवं दस्तावेजी साक्ष्यों के आधार पर कुलदीप, तैयब और हसीबुद्दीन उर्फ पप्पू को दोषी करार दिया।
न्यायालय ने अपने 32 पृष्ठीय निर्णय में तीनों दोषियों को तीन-तीन वर्ष के कठोर कारावास एवं पांच-पांच हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया। इस मामले में पैरोकार सतीश कुमार, कोर्ट मोहर्रिर राकेश सिंह तोमर तथा विशेष लोक अभियोजक सौरभ सिंह की प्रभावी पैरवी के चलते अभियोजन पक्ष आरोप सिद्ध कराने में सफल रहे
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