कलेक्ट्रेट परिसर में 'नो पार्किंग' का खेल!सरकारी काम रुका, तब जागा प्रशासन तैनात सुरक्षा कर्मियों की लापरवाही उजागर
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Published - 01 June 2026 82 views
कलेक्ट्रेट परिसर में 'नो पार्किंग' का खेल!सरकारी काम रुका, तब जागा प्रशासन तैनात सुरक्षा कर्मियों की लापरवाही उजागर
नेशनल न्यूज १रायबरेली रिपोर्ट- कपिल त्रिपाठी
रायबरेली। जिले के सबसे महत्वपूर्ण प्रशासनिक केंद्र कलेक्ट्रेट परिसर में सोमवार को उस समय अफरा-तफरी का माहौल बन गया, जब इंग्लिश दफ्तर के सामने मोड़ पर खड़ी एक चार पहिया गाड़ी की वजह से सरकारी सामान लेकर पहुंची एक बड़ी डीसीएम करीब 2 घंटे तक फंसी रही। हैरानी की बात यह रही कि जिस परिसर से जिले का प्रशासनिक संचालन होता है, वहीं यातायात व्यवस्था पूरी तरह बेपटरी नजर आई। जबकि यहां पर एक दर्जन से अधिक सुरक्षा गार्ड्स को तैनात किया गया है जिनकी लापरवाही साफ जाहिर दिखाई दे रही है।प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, आज दिनांक 1 जून 2026 को शाम करीब 3 बजे सरकारी सामग्री लेकर आई डीसीएम कलेक्ट्रेट परिसर में प्रवेश तो कर गई, लेकिन मोड़ पर अव्यवस्थित तरीके से खड़ी एक कार के कारण आगे नहीं बढ़ सकी। सरकारी कार्य प्रभावित होने के बावजूद वाहन चालक का कोई पता नहीं चला। करीब एक घंटे तक कार मालिक की तलाश की जाती रही, लेकिन जब वह नहीं मिला तो आखिरकार यातायात पुलिस की क्रेन बुलानी पड़ी।क्रेन की मदद से वाहन को हटाया गया, तब जाकर सरकारी वाहन अपने गंतव्य तक पहुंच सका। बाद में कार चालक दुर्विजय सिंह पुत्र महेंद्र सिंह, निवासी आलमबाग, लखनऊ मौके पर पहुंचे। उन्होंने बताया कि वह निजी कार्य से कलेक्ट्रेट आए थे और उन्हें जानकारी नहीं थी कि उक्त स्थान पर वाहन खड़ा करना प्रतिबंधित है।हालांकि सवाल यह उठता है कि क्या जिले के सबसे संवेदनशील प्रशासनिक परिसर में आने वाले लोगों को पार्किंग व्यवस्था की स्पष्ट जानकारी उपलब्ध कराई जाती है? यदि नहीं, तो इसकी जिम्मेदारी किसकी है?यातायात पुलिस ने वाहन को अपने कब्जे में लेकर चालान की कार्रवाई शुरू कर दी है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि यह कार्रवाई अन्य वाहन चालकों के लिए एक संदेश होगी ताकि भविष्य में कोई भी व्यक्ति नो पार्किंग अथवा अव्यवस्थित तरीके से वाहन खड़ा करने का साहस न कर सके।लेकिन इस कार्रवाई के बीच एक बड़ा सवाल भी खड़ा हो गया है। कलेक्ट्रेट परिसर में प्रतिदिन दर्जनों वाहन नियमों को ताक पर रखकर खड़े किए जाते हैं। कई वाहन ऐसे स्थानों पर खड़े रहते हैं जहां से आम लोगों और सरकारी वाहनों का आवागमन प्रभावित होता है, लेकिन उन पर शायद ही कभी कार्रवाई होती है। ऐसे में लोगों का कहना है कि क्या कार्रवाई केवल बाहरी जिलों से आने वाले लोगों तक सीमित है या फिर सभी नियम तोड़ने वालों पर समान रूप से लागू होगी?स्थानीय लोगों का आरोप है कि कलेक्ट्रेट परिसर में लंबे समय से अव्यवस्थित पार्किंग की समस्या बनी हुई है। कई बार अधिकारियों और कर्मचारियों के वाहन भी मनमाने ढंग से खड़े रहते हैं, जिससे आम नागरिकों को परेशानी उठानी पड़ती है। बावजूद इसके व्यवस्था सुधारने की दिशा में कोई ठोस कदम नजर नहीं आता।फिलहाल इस घटना ने एक बार फिर कलेक्ट्रेट परिसर की यातायात और पार्किंग व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि समय रहते व्यवस्था दुरुस्त नहीं की गई तो भविष्य में किसी बड़ी आपात स्थिति में इससे और भी गंभीर समस्याएं पैदा हो सकती हैं।
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