प्रजनन करने वाली मछलियां पकड़ने, बेचने पर रोक डीएम
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Published - 03 June 2026 5 views
प्रजनन करने वाली मछलियां पकड़ने, बेचने पर रोक डीएम
नेशनल न्यूज 1 रिपोर्ट सन्नो विश्वकर्मा
रायबरेली जिलाधिकारी सरनीत कौर ब्रोका ने उत्तर प्रदेश मत्स्य अधिनियम 1948 में दिये गये प्रावधानों के अन्तर्गत मत्स्य (विकास एवं नियंत्रण) नियमावली 1954 के अनुक्रम में 15 जुलाई से 30 सितम्बर तक भी अवधि में फ्राई एवं फिंगरलिंग को पक्डने, नष्ट करने अथवा बेचने तथा 15 जून से 30 जुलाई तक मत्स्य प्रजनन अवधि में शिकारमाही पर प्रतिबन्ध लगाने, विभिन्न जालों में मत्स्य शिकारमाही करने एवं ऐसे समस्त उपकरणों जिससे शिकारमाही सम्भव हो द्वारा शिकार करने पर तथा जनपद के प्रतिबन्धित क्षेत्र में मछली पकड़ने, मछली के बच्चों की निकासी करने आदि पर पूर्ण प्रतिबन्ध है। उन्होंने ने बताया कि मत्स्थ उत्पादन अनुभाग के शासनादेश तथा राजस्व विभाग के शासनादेश द्वारा 01 जून से 31 अगस्त तक नदियों में मत्स्य आखेट को प्रतिबन्धित किया गया है जिलाधिकारी ने उक्त प्राविधानों के आलोक में तथा परम्परागत मत्स्य पालन कर रहें समुदायों के हित एवं प्राकृतिक मत्स्य सम्पदा हानि न होने के दृष्टिगत निर्धारित निषेधाज्ञा आदेश पारित किये गये हैं, जिसमें कोई भी व्यक्ति प्रतिबन्धित अवधि 15 जून, 2026 से 30 जुलाई, 2026 तक मत्स्य प्रजनन अवधि में जलाशय, मीनाशय तथा नदियों में शिकारमाही नहीं करेगा। कोई भी व्यक्ति 15 जुलाई, 2026 से 30 सितम्बर, 2026 तक की अवधि में जलाशाय, मीनाशय तथा नदियों से फ्राई एवं फिंगरलिंग को पक्डने, नष्ट करने, अथवा बेचने की कार्यवाही नहीं करेगा और न ही ऐसा करने के लिये किसी को प्रेरित करेगा। कोई भी व्यक्ति 15 जून, 2026 से 30 जुलाई 2026 तक मत्स्य प्रजनन अवधि में तथा 15 जुलाई, 2026 से 30 सितम्बर, 2026 तक की अवधि में जलाशाय, मीनाशय तथा नदियों से फ्राई एवं फिंगरलिंग को पकड़ने, नष्ट करने, बेचने, बच्चों की निकासी
करने तथा ऐसे समस्त उपकरणों जिससे शिकारसाही सम्भव हो द्वारा शिकार माही करने का कार्य नहीं करेगा। 01 जून 2026 से 31 अगस्त 2026 तक नदियों में मत्स्य आखेट प्रतिबन्धित रहेगा। मत्स्य अधिनियम की धारा-6 के अन्तर्गत प्राधिकृत मत्स्य विभाग के अधिकारी तथा पुलिस उप निरीक्षक को बिना वारन्ट के उक्त कृत्य करने वाले व्यक्ति को गिरफ्तार करने का अधिकार होगा। मत्स्य विभाग के अधिकारियों द्वारा उक्त कृत्य करने वाले व्यक्ति के विरुद्ध अधिनियम की धारा 8 के अन्तर्गत एक मुश्त जुर्माना लगाने का अधिकारी होगा। कोई भी व्यक्ति अथवा मत्स्य व्यवसायी उक्त अवधि में किसी भी जलाशय, मीनाशय तथा नदियों में या उसके किसी भी भाग में मत्स्य स्पॉन, जीरा, अंगुलिका तथा मत्स्याखेट नहीं करेगा। उपरोक्त निषेधाज्ञा आदेश जनपद रायबरेली की सम्पूर्ण सीमा के अन्तर्गत उपरोक्त वर्णित समयावधि तक प्रभावी रहेगा। उपर्युक्त आदेश का उल्लंघन, उ0प्र0 मत्स्य अधिनियम 1948 की धारा-6 तथा धारा-8 के अन्तर्गत दण्डनीय अपराध होगा।
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