आस्था चुनावी मंच की सजावट नहीं करोड़ों हिंदुओं की धार्मिक विश्वास है
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Published - 08 July 2026 185 views
आस्था चुनावी मंच की सजावट नहीं, करोड़ों हिंदुओं की धार्मिक विश्वास है
नेशनल न्यूज 1 रिपोर्ट -सम्पादक संजय तिवारी
अंधेर नगरी चौपट राजा भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष के स्वागत समारोह में नाचते दिखे रहे हैं प्रभु हनुमान धार्मिक आस्था के साथ खिलवाड़
प्रभु श्रीराम जी के नाम पर राजनीति करने वालों को यह कभी नहीं भूलना चाहिए कि भगवान श्रीराम जी और उनके परम भक्त प्रभु हनुमान जी किसी राजनीतिक दल के प्रचारक नहीं हैं। वे करोड़ों हिंदुओं की आस्था, विश्वास और श्रद्धा है प्रभु श्री राम प्रभु हनुमान उनकी पूजा करने पर मनवांछित फल प्राप्त होता है भारतीय जनता पार्टी ने धार्मिक आस्था पर चोट पहुंचा है
राम मंदिर चंदा प्रकरण से जुड़े सवालों पर देश आज भी पारदर्शिता और निष्पक्ष कार्यवाही की अपेक्षा कर रहा है। ऐसे समय में लखनऊ में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष के कार्यक्रम के दौरान प्रभु हनुमान जी के स्वरूप के हाथ में भाजपा का झंडा देकर मंचीय प्रदर्शन कराना गंभीर प्रश्न खड़े करता है। क्या अब देवी-देवताओं और धार्मिक प्रतीकों का उपयोग भी राजनीतिक प्रचार का माध्यम बना दिया जाएगा?
यदि कोई अन्य राजनीतिक दल ऐसा करता, तो क्या भाजपा और उसके समर्थक चुप रहते? क्या तब धार्मिक भावनाओं के अपमान की बात नहीं होती? फिर आज यह दोहरा मापदंड क्यों?
सनातन धर्म किसी राजनीतिक दल की निजी विरासत नहीं है। भगवान श्रीराम जी और प्रभु हनुमान जी किसी पार्टी के चुनाव चिन्ह या प्रचार अभियान का हिस्सा नहीं हैं। उनका सम्मान हर परिस्थिति में सर्वोपरि होना चाहिए।
धर्म के नाम पर वोट मांगना और फिर उसी धर्म के पूज्य प्रतीकों को राजनीतिक मंचों की शोभा बनाना उचित नहीं कहा जा सकता। है देश की जनता सब देख रही है और समय आने पर अपना निर्णय भी देगा।
भारतीय जनता पार्टी के सांसद विधायकों ने धार्मिक आस्था के साथ खिलवाड़ के वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद सदा चुप्पी
आस्था का सम्मान कीजिए, उसका राजनीतिक उपयोग नहीं। होना चाहिए
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