डीह में आकाशीय बिजली का कहर, दुधारू भैंस की मौके पर मौत,शीशम के पेड़ पर गिरी वज्रपात की चपेट में आई बंधी भैंस, गरीब किसान के सामने आजीविका का संकट
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Published - 29 August 2026 31 views
डीह में आकाशीय बिजली का कहर, दुधारू भैंस की मौके पर मौत,शीशम के पेड़ पर गिरी वज्रपात की चपेट में आई बंधी भैंस, गरीब किसान के सामने आजीविका का संकट
नेशनल न्यूज १रायबरेली रिपोर्ट कपिल त्रिपाठी
डीह (रायबरेली)। सलोन तहसील क्षेत्र के डीह थाना अंतर्गत सुंदरगंज चौराहा के पास शुक्रवार को खराब मौसम के बीच हुई मूसलाधार बारिश के दौरान आकाशीय बिजली गिरने से एक दुधारू भैंस की दर्दनाक मौत हो गई। अचानक हुए वज्रपात से भैंस की मौके पर ही जान चली गई। घटना के बाद पीड़ित किसान के परिवार में मातम छा गया। वहीं, दुधारू पशु की मौत से गरीब किसान के सामने परिवार के भरण-पोषण और आजीविका का गंभीर संकट खड़ा हो गया है।जानकारी के अनुसार सुंदरगंज चौराहा निवासी किसान धर्मेंद्र कुमार पुत्र महाबली ने अपनी दुधारू भैंस को घर के पास स्थित एक शीशम के पेड़ के नीचे बांध रखा था। शुक्रवार को अचानक मौसम ने करवट ली और आसमान में बादल घिरने के साथ तेज गरज-चमक शुरू हो गई। देखते ही देखते मूसलाधार बारिश होने लगी।इसी दौरान तेज आवाज के साथ शीशम के पेड़ पर आकाशीय बिजली गिर गई। पेड़ के नीचे बंधी भैंस भी वज्रपात की चपेट में आ गई। बिजली की तेज चपेट और झुलसने के कारण भैंस वहीं गिर पड़ी और कुछ ही देर में उसने दम तोड़ दिया। घटना के बाद आसपास मौजूद ग्रामीण मौके पर पहुंचे और किसान को घटना की जानकारी दी।भैंस की मौत की सूचना मिलते ही डीह के ग्राम प्रधान प्रतिनिधि शुभम अग्रहरि मौके पर पहुंचे। उन्होंने पीड़ित किसान को ढांढस बंधाया और घटना की जानकारी तत्काल क्षेत्रीय लेखपाल तथा पशु चिकित्सा विभाग के अधिकारियों को दी। ग्रामीणों ने भी मौके पर पहुंचकर घटना का जायजा लिया,बताया जा रहा है कि धर्मेंद्र कुमार बेहद गरीब किसान हैं और मृत भैंस के दूध की बिक्री से ही परिवार के दैनिक खर्च और भरण-पोषण में मदद मिलती थी। ऐसे में अचानक दुधारू पशु की मौत हो जाने से परिवार के सामने आर्थिक संकट गहरा गया है। किसान के लिए यह नुकसान महज एक पशु की मौत नहीं, बल्कि उसकी रोजी-रोटी के साधन पर सीधा आघात माना जा रहा है।ग्रामीणों और परिजनों ने प्रशासन से मांग की है कि पशु चिकित्साधिकारी द्वारा नियमानुसार मृत भैंस का पोस्टमार्टम कराया जाए तथा क्षेत्रीय लेखपाल द्वारा मौके का निरीक्षण कर क्षति की रिपोर्ट तैयार की जाए। इसके आधार पर पीड़ित किसान को दैवीय आपदा राहत कोष अथवा शासन की प्रचलित व्यवस्था के तहत नियमानुसार आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जाए, ताकि गरीब परिवार को कुछ राहत मिल सके।ग्रामीणों का कहना है कि प्राकृतिक आपदा के कारण हुए इस नुकसान में प्रशासन को संवेदनशीलता दिखाते हुए जल्द से जल्द आवश्यक कार्रवाई करनी चाहिए, जिससे पीड़ित किसान को आर्थिक सहायता मिल सके और उसके परिवार की आजीविका का संकट कुछ कम हो सके।
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