साढ़े तीन करोड़ का पुल एक माह में ‘बीमार’! नैया नाले के नवनिर्मित पुल में बड़ा होल, निर्माण गुणवत्ता पर गंभीर सवाल
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Published - 27 August 2026 58 views
साढ़े तीन करोड़ का पुल एक माह में ‘बीमार’! नैया नाले के नवनिर्मित पुल में बड़ा होल, निर्माण गुणवत्ता पर गंभीर सवाल
नेशनल न्यूज १रायबरेली रिपोर्ट -कपिल त्रिपाठी
महराजगंज/रायबरेली। करोड़ों रुपये की लागत से तैयार कराए जा रहे विकास कार्यों की गुणवत्ता को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। महराजगंज कोतवाली क्षेत्र के कैर गांव के पास नैया नाले पर करीब 3.50 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित नवनिर्मित पुल के जोड़ पर बड़ा होल हो जाने से निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि पुल का निर्माण पूरा होने के बाद इसे जुलाई माह में ही आवागमन के लिए खोला गया था, लेकिन महज एक महीने के भीतर पुल के जोड़ पर गड्ढा और होल दिखाई देने लगा।
स्थानीय लोगों के मुताबिक, पुल का निर्माण इस उम्मीद के साथ कराया गया था कि इससे क्षेत्र के ग्रामीणों को वर्षों तक सुरक्षित और सुगम आवागमन की सुविधा मिलेगी। लेकिन पुल खुलने के कुछ ही समय बाद उसके जोड़ पर आई बड़ी खामी ने निर्माण कार्य की मजबूती और गुणवत्ता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। पुल से प्रतिदिन छोटे-बड़े वाहनों के साथ ग्रामीणों का आवागमन होता है। ऐसे में पुल के जोड़ पर बना गड्ढा किसी बड़े हादसे का कारण बन सकता है।
उद्घाटन के कुछ ही समय बाद सामने आई खामी
ग्रामीणों का कहना है कि करोड़ों रुपये की लागत से तैयार होने वाले किसी भी पुल की गुणवत्ता और तकनीकी मजबूती पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए। पुल को यातायात के लिए खोले जाने के कुछ ही समय बाद इस तरह की खराबी सामने आना सामान्य नहीं माना जा सकता। लोगों का आरोप है कि यदि निर्माण में निर्धारित मानकों का पूरी तरह पालन किया गया होता तो इतनी कम अवधि में पुल के जोड़ पर इस तरह का होल नहीं बनता।
ग्रामीणों ने आशंका जताई कि यदि समय रहते इस खामी को दुरुस्त नहीं कराया गया तो गड्ढा धीरे-धीरे और बड़ा हो सकता है। खासकर रात के समय या बारिश के दौरान यहां से गुजरने वाले वाहन चालकों के लिए खतरा और बढ़ सकता है।
बड़े वाहनों के गुजरने पर हादसे का खतरा
पुल के जोड़ पर बने होल की वजह से वाहन चालकों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। बड़े और भारी वाहनों के गुजरने पर पुल के क्षतिग्रस्त हिस्से पर दबाव बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते मरम्मत नहीं कराई गई तो छोटी खामी आगे चलकर गंभीर समस्या का रूप ले सकती है।
लोगों ने संबंधित विभाग से मांग की है कि मौके पर तकनीकी टीम भेजकर पुल के क्षतिग्रस्त हिस्से की जांच कराई जाए। साथ ही निर्माण में इस्तेमाल सामग्री, पुल के जोड़ की तकनीकी मजबूती और निर्माण की गुणवत्ता की भी जांच होनी चाहिए।
तकनीकी जांच और जिम्मेदारी तय करने की मांग
ग्रामीणों ने सवाल उठाया है कि जब पुल निर्माण में करोड़ों रुपये खर्च किए गए हैं तो उसकी गुणवत्ता की निगरानी किस स्तर पर की गई। निर्माण के दौरान संबंधित अधिकारियों और तकनीकी कर्मचारियों ने मानकों की जांच किस तरह की और पुल को यातायात के लिए खोलने से पहले उसकी गुणवत्ता का परीक्षण किया गया था या नहीं, यह भी जांच का विषय है।
लोगों का कहना है कि सरकारी निर्माण कार्यों में जनता का पैसा खर्च होता है। इसलिए निर्माण एजेंसी से लेकर निगरानी करने वाले जिम्मेदार अधिकारियों तक की जवाबदेही तय होना जरूरी है। यदि जांच में निर्माण संबंधी लापरवाही सामने आती है तो जिम्मेदारों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए और पुल की मरम्मत के साथ उसकी तकनीकी मजबूती सुनिश्चित की जानी चाहिए।
एक महीने में ही सवालों के घेरे में आया करोड़ों का निर्माण
नवनिर्मित पुल के जोड़ पर इतनी जल्दी होल सामने आने के बाद क्षेत्र में यह चर्चा भी तेज हो गई है कि आखिर साढ़े तीन करोड़ रुपये की लागत से तैयार पुल एक महीने में ही किस वजह से ‘बीमार’ पड़ गया? क्या निर्माण में निर्धारित मानकों की अनदेखी हुई, सामग्री की गुणवत्ता में कमी रही या फिर निर्माण के बाद आवश्यक तकनीकी परीक्षण में लापरवाही बरती गई?
फिलहाल इन सवालों का जवाब संबंधित विभाग की जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा। क्षेत्रीय लोगों ने मांग की है कि मामले को महज खानापूर्ति तक सीमित न रखते हुए पुल की स्वतंत्र तकनीकी जांच कराई जाए और जांच रिपोर्ट के आधार पर जिम्मेदारी तय की जाए। करोड़ों की लागत से बनी सार्वजनिक संपत्ति की गुणवत्ता से समझौता होने की स्थिति में कार्रवाई के साथ-साथ भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए भी ठोस व्यवस्था की जरूरत है।
अब निगाहें संबंधित विभाग की ओर हैं कि वह पुल की खामी को कितनी गंभीरता से लेता है और क्या इस मामले में केवल गड्ढे की मरम्मत होगी या फिर निर्माण की गुणवत्ता की पूरी तकनीकी जांच कराकर जिम्मेदारों की जवाबदेही भी तय की जाएगी।
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