भारी बारिश ने खोली गौशालाओं की व्यवस्थाओं की पोल जलभराव और गंदगी के बीच बेहाल गोवंश
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Published - 03 September 2026 43 views
भारी बारिश ने खोली गौशालाओं की व्यवस्थाओं की पोल जलभराव और गंदगी के बीच बेहाल गोवंश
नेशनल न्यूज १रायबरेली रिपोर्ट -कपिल त्रिपाठी
रायबरेली। ज़िले की कई गौशालाओं में कीचड़ और पानी की समस्या से बढ़ी मुश्किलें, चारा-पानी और साफ-सफाई की व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं। जिले में लगातार हो रही भारी बारिश ने आम जनजीवन के साथ-साथ गौशालाओं की व्यवस्थाओं को भी प्रभावित कर दिया है। बारिश के पानी के कारण कई स्थानों पर गौशाला परिसरों में जलभराव और कीचड़ की स्थिति बनने से गोवंशों के सामने मुश्किलें बढ़ गई हैं। खुले हिस्सों में पानी जमा होने के कारण पशुओं को खड़े होने और बैठने तक के लिए सूखी जगह तलाशनी पड़ रही है। वहीं गंदगी और कीचड़ के बीच पशुओं के रहने से संक्रमण तथा अन्य बीमारियों का खतरा भी बढ़ गया है।लगातार बारिश के चलते गौशालाओं में जल निकासी की व्यवस्था सबसे बड़ी चुनौती बनकर सामने आई है। कई स्थानों पर पानी की निकासी पर्याप्त न होने से परिसर में बारिश का पानी जमा हो रहा है। पानी के साथ बहकर आई गंदगी और कीचड़ ने स्थिति को और खराब कर दिया है। ऐसे में गोवंशों को लंबे समय तक गीले और कीचड़युक्त स्थान पर रहना पड़ रहा हैसूखे स्थान की कमी से परेशानी बढ़ गई है। बारिश के मौसम में गोवंशों के लिए सूखे और सुरक्षित स्थान की पर्याप्त व्यवस्था बेहद जरूरी है, लेकिन जलभराव वाले गौशाला परिसरों में यह व्यवस्था चुनौतीपूर्ण नजर आ रही है। लगातार गीली जमीन पर रहने से पशुओं को शारीरिक परेशानी होने के साथ ही उनके स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल असर पड़ने की आशंका रहती है।इसके अलावा बारिश के कारण भूसा और चारा सुरक्षित रखना भी बड़ी चुनौती है। यदि चारा नमी की चपेट में आता है तो उसके खराब होने की आशंका रहती है। ऐसे में गौशालाओं में पर्याप्त मात्रा में सूखा चारा सुरक्षित रखने तथा स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने की व्यवस्था पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है।जल निकासी और सफाई व्यवस्था पर सवाल बन गया है। रायबरेली में हाल के दिनों में लगातार बारिश से विभिन्न ग्रामीण और शहरी इलाकों में जलभराव की स्थिति सामने आई है। जिले में बारिश के कारण सड़कें और निचले इलाके भी जलमग्न हुए हैं। ऐसे में गौशालाओं में जल निकासी की व्यवस्था को लेकर भी प्रशासन के सामने चुनौती बढ़ गई है।स्थानीय स्तर पर लोगों का कहना है कि गौशालाओं में नियमित सफाई, जल निकासी और कीचड़ हटाने की व्यवस्था लगातार होनी चाहिए, ताकि बारिश के दौरान पशुओं को परेशानी न हो। विशेषकर निचले स्थानों पर बनी गौशालाओं में पानी की निकासी के लिए पंपिंग सेट, नालियों की सफाई और वैकल्पिक सुरक्षित स्थान की व्यवस्था पहले से सुनिश्चित किए जाने की जरूरत है।प्रशासन के सामने बड़ी जिम्मेदारीबारिश के इस दौर में गौशालाओं की स्थिति पर प्रशासन और पशुपालन विभाग की जिम्मेदारी और बढ़ गई है। जरूरत है कि जिले की सभी गौशालाओं का स्थलीय निरीक्षण कर जलभराव की स्थिति का जायजा लिया जाए। जहां पानी जमा है, वहां तत्काल निकासी कराई जाए और पशुओं को सूखे स्थान पर रखने की व्यवस्था की जाए।इसके साथ ही गौशालाओं में पर्याप्त भूसा, हरा चारा, स्वच्छ पेयजल, दवाएं और साफ-सफाई की व्यवस्था सुनिश्चित करना जरूरी है। बारिश के कारण उत्पन्न परिस्थितियों में लापरवाही पशुओं के लिए गंभीर समस्या पैदा कर सकती है।सरकार की ओर से गौशालाओं में गोवंशों के संरक्षण और बेहतर व्यवस्था के लिए लगातार योजनाएं संचालित की जा रही हैं, लेकिन बारिश के मौसम में जमीनी स्तर पर व्यवस्थाओं की वास्तविक स्थिति की निगरानी बेहद जरूरी है। सवाल यह है कि यदि सामान्य बारिश में ही गौशाला परिसर जलभराव और गंदगी की समस्या से घिर जाएं तो लंबे समय तक चलने वाली बारिश में पशुओं की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित होगी?फिलहाल जरूरत इस बात की है कि संबंधित अधिकारी गौशालाओं का नियमित निरीक्षण करें और जलभराव, कीचड़ तथा सफाई की समस्या का तत्काल समाधान कराएं, ताकि बेजुबान गोवंशों को बारिश के बीच बदहाली का सामना न करना पड़े।
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