किसानों की आय बढ़ाने को गो-आधारित खेती और पशुपालन को दें बढ़ावा
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Published - 12 September 2026 4 views
किसानों की आय बढ़ाने को गो-आधारित खेती और पशुपालन को दें बढ़ावा
नेशनल न्यूज 1 बांदा रिपोर्ट संध्या
बांदा। शनिवार को सर्किट हाउस सभागार में पशुधन एवं दुग्ध विकास मंत्री उत्तर प्रदेश धर्मपाल सिंह की अध्यक्षता में मंडलीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में बांदा, चित्रकूट, हमीरपुर एवं महोबा जनपदों में पशुपालन, गोवंश संरक्षण, गौशाला संचालन, दुग्ध उत्पादन एवं विभागीय योजनाओं की प्रगति की समीक्षा की गई। मंत्री ने अधिकारियों को किसानों और पशुपालकों की आय बढ़ाने के लिए पशुपालन को कृषि गतिविधियों से जोड़कर प्रभावी ढंग से कार्य करने के निर्देश दिए।
मंत्री ने कहा कि कृषि और पशुपालन एक-दूसरे के पूरक हैं। किसानों को गो-आधारित प्राकृतिक खेती, जैविक खाद, गोबर एवं गोमूत्र के उपयोग तथा दुग्ध उत्पादन के प्रति जागरूक किया जाए। उन्होंने सभी पशु चिकित्साधिकारियों एवं विभागीय अधिकारियों को गांवों में जाकर पशुपालकों को पशु स्वास्थ्य, बेहतर पशुपालन प्रबंधन और गोबर, गोमूत्र एवं दूध के उपयोग की जानकारी देने के निर्देश दिए।
गौशालाओं में गोबर से रोजगार बढ़ाने पर जोर
मंत्री ने बांदा जनपद की नरैनी, रगौली एवं भटपुरा गौशालाओं की जानकारी लेते हुए गोबर से दीपावली के दीपक, होली के कंडे-उपले एवं अन्य उपयोगी उत्पाद तैयार कराने तथा उनके विपणन की व्यवस्था करने के निर्देश दिए। साथ ही गौशालाओं में उपलब्ध गोबर से बायोगैस उत्पादन को बढ़ावा देने और सफल प्रयोगों का प्रचार-प्रसार कराने को कहा।
बांदा में दो नई गौशालाओं का प्रस्ताव
मंत्री ने मुख्य विकास अधिकारी बांदा अजय कुमार पांडेय को जनपद में दो नई गौशालाओं एवं एक पशु चिकित्सालय की स्थापना का प्रस्ताव शासन को भेजने के निर्देश दिए। इसके अलावा मुर्गी पालन, बकरी पालन एवं सूकर पालन को ग्रामीण परिवारों की आय का माध्यम बनाने पर जोर दिया गया।
बैठक में देशी गायों की नस्ल सुधार एवं संरक्षण, मुख्यमंत्री स्वदेशी गौ-संवर्धन योजना, प्रगतिशील पशुपालक प्रोत्साहन योजनाओं और विभागीय अनुदान का लाभ पात्र किसानों तक पहुंचाने के निर्देश दिए गए। उत्कृष्ट पशुपालकों को प्रोत्साहित करने के लिए पशु मेले आयोजित कर प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित करने को भी कहा गया।
मंत्री ने पशुपालकों को 1962 टोल-फ्री पशु चिकित्सा सेवा की जानकारी देने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि गांव, किसान और पशुधन ग्रामीण अर्थव्यवस्था की मजबूत आधारशिला हैं। पशुपालन को आय के अतिरिक्त स्रोत के रूप में विकसित करते हुए पात्र लाभार्थियों तक योजनाओं का लाभ पारदर्शी एवं प्रभावी ढंग से पहुंचाया जाए। बैठक में मंडल एवं जनपद स्तर के संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे।
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