बोर्ड पर तय है तहबाजारी शुल्क फिर भी मनमानी वसूली के लगे आरोप
-
By
Admin
Published - 27 September 2026 44 views
बोर्ड पर तय है तहबाजारी शुल्क, फिर भी मनमानी वसूली के लगे आरोप
नेशनल न्यूज 1 बांदा रिपोर्ट संध्या
बांदा में जिला पंचायत की तहबाजारी व्यवस्था पर फिर उठे सवाल, बाहरी वाहनों से कथित वसूली की जांच की मांग
बांदा में जिला पंचायत की ओर से खनिज परिवहन शुल्क वसूली को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। खास बात यह है कि तहबाजारी/खनिज परिवहन शुल्क की निर्धारित दरें बाकायदा बोर्ड पर अंकित होने के बावजूद यदि वाहन चालकों से उससे अधिक रकम मांगी या वसूली गई है, तो यह गंभीर जांच का विषय है।
उपलब्ध शुल्क बोर्ड के अनुसार वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए खनिज परिवहन शुल्क वसूली की अवधि 1 मई 2026 से 31 मार्च 2027 तक बताई गई है। बोर्ड पर वसूली की अलग-अलग दरें स्पष्ट रूप से दर्ज हैं।
निर्धारित दरों के अनुसार पशुओं द्वारा खींची जाने वाली गाड़ी से 30 रुपये प्रति फेरा, मानव चालित नाव से 50 रुपये, मशीन/मोटर चालित नाव से 100 रुपये, दो चक्का ट्रैक्टर-ट्रॉली से 120 रुपये तथा चार चक्का या अधिक ट्रॉली से 200 रुपये प्रति फेरा निर्धारित बताए गए हैं।
इसी तरह ट्रक के प्रकार के अनुसार 230 रुपये से लेकर 750 रुपये प्रति फेरा तक शुल्क अंकित है। यानी वाहन के प्रकार के आधार पर शुल्क पहले से निर्धारित है और बोर्ड के माध्यम से इसकी जानकारी भी सार्वजनिक की गई है।
फिर सवाल—बोर्ड पर तय दर से अधिक वसूली हुई तो किसके इशारे पर?
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब शुल्क की दरें सार्वजनिक रूप से बोर्ड पर लिखी हैं, तो वाहन चालकों से कथित तौर पर अतिरिक्त रकम लिए जाने की शिकायतें क्यों सामने आ रही हैं?
क्या वसूली करने वाले कर्मचारियों या ठेकेदार के पास निर्धारित शुल्क के अलावा कोई अन्य शुल्क लेने का अधिकार है? यदि नहीं, तो ऐसी शिकायतों पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
बाहरी वाहनों को रोककर वसूली के आरोप
स्थानीय स्तर पर यह भी आरोप सामने आए हैं कि बांदा में प्रवेश करने वाले बाहरी जनपदों अथवा मध्य प्रदेश की ओर से आने वाले कुछ वाहनों को रोककर तहबाजारी के नाम पर रकम मांगी जाती है। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है, इसलिए पूरे मामले की निष्पक्ष जांच आवश्यक है।
जिला पंचायत और संबंधित प्रशासन को स्पष्ट करना चाहिए कि कहां-कहां वसूली केंद्र अधिकृत हैं, किस वाहन से कितनी रकम ली जानी है और प्रत्येक भुगतान की रसीद देना अनिवार्य है या नहीं।
जांच हो तो सामने आएगा सच
यदि निर्धारित शुल्क के अनुसार ही वसूली हो रही है तो वाहन चालकों को किसी तरह की आपत्ति नहीं होनी चाहिए। लेकिन यदि निर्धारित दर से अधिक रकम वसूले जाने की शिकायत की गईं है तो जिम्मेदारी तय कर नियमानुसार कार्यवाही की जानी चाहिए।
सीधा सवाल है—जब तहबाजारी शुल्क का बोर्ड दरों के साथ सार्वजनिक रूप से लगा है, तो फिर निर्धारित शुल्क से अलग कथित वसूली आखिर किस आधार पर की गई?
जिला पंचायत प्रशासन से मांग है कि वसूली की दर, अधिकृत ठेकेदार, वसूली स्थलों और अब तक प्राप्त शिकायतों की स्थिति सार्वजनिक की जाए, परेशान वाहन चालको ने की जिलाधिकारी से शिकायत
देखना यह है की कार्यवाई होतीं है या यू हीं चलती ठेगी तहबजारी के गुंडों की वसूली
सम्बंधित खबरें
-
बाढ़-अतिवृष्टि की समीक्षा में डीएम के सख्त निर्देश, फसल क्षति का एरिया-वाइज सर्वे कराएंनेशनल न्यूज 1
-
लगातार बारिश और तेज हवा से किसान की फसल बर्बाद भरण-पोषण का संकटनेशनल न्यूज १रायबरेली रिपोर्ट कपिल त्
-
बोर्ड पर तय है तहबाजारी शुल्क, फिर भी मनमानी वसूली के लगे आरोप नेशनल न्यूज 1 बांदा रिपोर्ट संध्
-
लगातार बारिश से जलभराव, डीएम-एसपी ने प्रभावित क्षेत्रों का किया निरीक्षणजल निकासी में तेजी लाने, पंप