माहे पासी किले रोहनिया पर पूर्व विधायक कुंवर अजय पाल सिंह ने किया मेले की तैयारियों का निरीक्षण बोले पासी समाज की धरोहर से छेड़छाड़ बर्दाश्त नहीं
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Published - 16 October 2026 152 views
माहे पासी किले रोहनिया पर पूर्व विधायक कुंवर अजय पाल सिंह ने किया मेले की तैयारियों का निरीक्षण बोले पासी समाज की धरोहर से छेड़छाड़ बर्दाश्त नहीं
नेशनल न्यूज 1 रिपोर्ट संपादक संजय तिवारी
रोहनिया / ऊंचाहार क्षेत्र के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक गौरव के प्रतीक माहे पासी किला रोहनिया में आगामी मेले की तैयारियां जोरों पर हैं। इसी क्रम में क्षेत्र के लोकप्रिय पूर्व विधायक कुंवर अजय पाल सिंह ने आज किले पर पहुंचकर मेले की तैयारियों एवं व्यवस्थाओं का स्थलीय निरीक्षण किया।
निरीक्षण के दौरान उन्होंने मेला परिसर, श्रद्धालुओं के बैठने, पेयजल, प्रकाश, सुरक्षा और सफाई व्यवस्था का बारीकी से जायजा लिया। उन्होंने आयोजकों और प्रशासनिक टीम को निर्देशित किया कि मेले में आने वाले हजारों श्रद्धालुओं और क्षेत्रवासियों को किसी भी प्रकार की असुविधा न हो, इसका विशेष ध्यान रखा जाए।
इस अवसर पर पूर्व विधायक ने सख्त लहजे में कहा कि माहे पासी किला केवल एक टीला या अवशेष नहीं, बल्कि पूरे पासी समाज की आन, बान, शान और स्वाभिमान का प्रतीक है। उन्होंने चेतावनी दी कि मेले के दौरान यदि किसी भी प्रकार के राजनीतिक गुंडे, असामाजिक तत्वों या तोड़फोड़ और हुड़दंग मचाने वालों ने माहौल बिगाड़ने की कोशिश की तो उनके विरुद्ध सख्त से सख्त कानूनी कार्यवाही कराई जाएगी।
पासी समाज का गौरव हैं राजा माहे पासी
माहे पासी किले का इतिहास पासी समाज के गौरवशाली अतीत से जुड़ा है। स्थानीय लोक-कथाओं और इतिहासकारों के अनुसार, राजा माहे पासी एक वीर, पराक्रमी और स्वाभिमानी शासक थे। उन्होंने अपने क्षेत्र और समाज की रक्षा के लिए अदम्य साहस का परिचय दिया था। उनकी वीरता, शौर्य और न्यायप्रियता आज भी बुजुर्गों की जुबानी और लोकगीतों में जीवंत है।
पासी समाज, जो भारत के मूलनिवासी और बहादुर कौमों में से एक माना जाता है, अपने महापुरुषों के बलिदान को कभी नहीं भूला। राजा माहे पासी उसी गौरवशाली परंपरा के प्रतीक हैं। उनकी याद में हर वर्ष रोहनिया किले पर लगने वाला यह मेला केवल एक मेला नहीं, बल्कि अपने पूर्वजों को नमन करने, अपनी संस्कृति को याद करने और नई पीढ़ी को अपने इतिहास से जोड़ने का महापर्व है।
इस मेले में दूर-दराज से पासी समाज के लोग सहित सर्व समाज के लोग बड़ी संख्या में एकत्रित होते हैं। यहां विभिन्न सामाजिक, सांस्कृतिक कार्यक्रम, विरासत पर चर्चा और आपसी भाईचारे को मजबूत करने का संदेश दिया जाता है।
श्रद्धालुओं की सुविधा पहली प्राथमिकता
पूर्व विधायक कुंवर अजय पाल सिंह ने कहा कि इस मेले की भव्यता बनी रहे और यह शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो, इसके लिए हर संभव प्रयास किया जाएगा। उन्होंने कहा कि यह हमारी जिम्मेदारी है कि हम अपने महापुरुषों की धरोहर को संजो कर रखें और आने वाली पीढ़ियों तक उसकी गाथा पहुंचाएं।
उन्होंने उपस्थित लोगों से भी अपील की कि वे मेले को अनुशासित और गरिमामय बनाए रखने में सहयोग करें। यह मेला पासी समाज के एकता और स्वाभिमान का प्रतीक बने, यही सच्ची श्रद्धांजलि होगी वीर शिरोमणि राजा माहे पासी जी को। भारी संख्या में क्षेत्रीय ग्रामीण लोग उपस्थित रहे
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