तहबाजारी वसूली पर सवाल आदेश के बावजूद शुल्क वसूलने का आरोप
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Published - 19 October 2026 5 views
तहबाजारी वसूली पर सवाल आदेश के बावजूद शुल्क वसूलने का आरोप
नेशनल न्यूज 1 बांदा रिपोर्ट संध्या
बांदा। जनपद में जिला पंचायत की तहबाजारी वसूली व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। मध्यप्रदेश से आने वाले वाहनों से तहबाजारी शुल्क नहीं वसूलने के निर्देश जारी होने के बावजूद कथित रूप से वसूली किए जाने की शिकायत सामने आई है। इस मामले में पाण्डेय ग्रुप और उसके संचालक सौरभ पांडेय पर आरोप लगाए जा रहे हैं। हालांकि, आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। अब मामले में जिला पंचायत प्रशासन की भूमिका और आदेश के अनुपालन को लेकर स्थिति स्पष्ट होने का इंतजार है।
लिखित आदेश के बाद भी वसूली की शिकायत
प्राप्त जानकारी के अनुसार, अपर मुख्य अधिकारी, जिला पंचायत बांदा की ओर से 9 सितंबर 2026 को पत्र जारी कर मध्यप्रदेश से आने वाले वाहनों से तहबाजारी शुल्क नहीं वसूलने के संबंध में निर्देश दिए गए थे। इसके बावजूद यदि संबंधित वाहनों से शुल्क वसूला जा रहा है, तो यह जांच का विषय है कि आदेश का पालन क्यों नहीं हो रहा है।इस मामले में यह भी स्पष्ट होना जरूरी है कि जारी आदेश किन वाहनों पर लागू होता है और संबंधित ठेकेदार व वसूलीकर्मियों को इसकी जानकारी दी गई थी या नहीं। आदेश के बाद भी वसूली की शिकायतें सही हैं तो जिम्मेदारी तय करने के लिए विभागीय जांच आवश्यक है।
पाण्डेय ग्रुप पर आरोप, निष्पक्ष जांच की मांग
तहबाजारी वसूली को लेकर पाण्डेय ग्रुप के संचालक सौरभ पांडेय पर आरोप लगाए जा रहे हैं। हालांकि, संबंधित पक्ष का आधिकारिक बयान सामने आना बाकी है। ऐसे में बिना जांच किसी को दोषी ठहराना उचित नहीं होगा।
प्रशासन को शिकायतों के आधार पर वसूली से जुड़े अभिलेखों, रसीदों और संबंधित आदेश का सत्यापन कराना चाहिए, ताकि यह पता चल सके कि निर्धारित नियमों के अनुसार शुल्क लिया जा रहा है या कहीं निर्देशों के विपरीत वसूली तो नहीं हो रही है।
जिला पंचायत प्रशासन की जिम्मेदारी पर सवाल
मामले में जिला पंचायत के संबंधित अधिकारियों के सामने आदेश का अनुपालन सुनिश्चित कराने की चुनौती है। यदि मध्यप्रदेश से आने वाले वाहनों को निर्धारित आदेश के तहत शुल्क से छूट दी गई है, तो संबंधित वसूली स्थल पर इसकी जानकारी उपलब्ध कराना और निर्देशों का पालन कराना आवश्यक है।शिकायतों की गंभीरता को देखते हुए जिलाधिकारी बांदा, मुख्य विकास अधिकारी तथा जिला पंचायत के संबंधित अधिकारियों से मामले की जांच कर स्थिति स्पष्ट करने की अपेक्षा की जा रही है। यदि जांच में नियमों के विपरीत वसूली की पुष्टि होती है, तो नियमानुसार जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए।
*प्रशासन से उठे ये अहम सवाल*
9 सितंबर 2026 को जारी पत्र के अनुपालन में अब तक क्या कार्रवाई हुई?
क्या संबंधित ठेकेदार और वसूलीकर्मियों को लिखित आदेश की जानकारी दी गई?
क्या कथित वसूली की शिकायतों की जांच कराई जाएगी?
क्या वसूली की रसीदों और संबंधित अभिलेखों का सत्यापन होगा?
यदि आदेश के विपरीत वसूली प्रमाणित होती है, तो जिम्मेदारी किसकी तय होगी?
वाहन स्वामियों की शिकायतों के निस्तारण के लिए क्या व्यवस्था की गई है?
जांच और आधिकारिक जवाब का इंतजार
तहबाजारी वसूली को लेकर उठे सवालों के बीच अब जिला पंचायत प्रशासन के आधिकारिक स्पष्टीकरण का इंतजार है। मामले की निष्पक्ष जांच कर आदेश के वास्तविक दायरे, वसूली की स्थिति और संबंधित पक्षों की भूमिका स्पष्ट की जानी चाहिए।
फिलहाल, पाण्डेय ग्रुप और उसके संचालक पर लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। संबंधित पक्ष का जवाब भी सामने आना बाकी है। जांच के निष्कर्ष और विभागीय स्पष्टीकरण के बाद ही मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
जनहित का सवाल यह है कि जब शुल्क वसूली को लेकर लिखित निर्देश जारी किए जा चुके हैं, तो उनके अनुपालन की निगरानी कौन कर रहा है और शिकायतों पर जिला पंचायत प्रशासन क्या कदम उठाएगा?
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