बदौसा खदान में अवैध खनन का खेल जारी,बागे नदी पर मंडराया खतरा
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Published - 15 May 2026 12 views
बदौसा खदान में अवैध खनन का खेल जारी,बागे नदी पर मंडराया खतरा
नेशनल न्यूज 1 बांदा रिपोर्ट संध्या
बांदा बदौसा क्षेत्र के बागे नदी में धड़ल्ले से चल रहा है अवैध खनन का काला खेल, खनन माफियाओं के हौसले इतने बुलंद हैं कि रात दिन दर्जनों मशीनों से नदी के सीने पर कहर बरसा रहे है बागे नदी का अस्तित्व खतरे में है। यहां के बदौसा खदान क्षेत्र में अवैध बालू खनन का अंधाधुंध कारोबार इतना बढ़ गया है कि नदी का हर ज़र्रा-ज़र्रा थर्रा रहा है। स्थानीय निवासी, पर्यावरणविद और किसान समुदाय लगातार चेतावनी दे रहे हैं कि केन नदी अब जीवन बचाने के लिए संघर्ष कर रही है। खनन के नाम पर चल रहे इस अवैध कारोबार के पीछे खनन माफिया राजू का नाम सामने आ रहा है। जो बेखौफ तरीके से खनन कर रहा है, बल्कि राजनीतिक संरक्षण के आरोपों के बीच प्रशासनिक तंत्र पर भी कथित तौर पर दबाव बनाए हुए है।
जानकारी के मुताबिक, पट्टाधारकों द्वारा पूरी तरह नगरीय पर्यावरण अधिकरण (एनजीटी) के नियमों को धता बताते हुए भारी पोकलैंड मशीनों के माध्यम से नदी के जलधारा में 10 से 15 फीट गहरे गड्ढे बनाए जा रहे हैं। ये गड्ढे न केवल नदी के प्राकृतिक प्रवाह में बाधा डाल रहे हैं, बल्कि किनारे के खेतों की मेड़बंदी तक को खतरे में डाल रहे हैं। स्थानीय किसानों का आरोप है कि खनन के चलते उनके खेतों की भूमि कट रही है, सिंचाई के स्रोत खत्म हो रहे हैं और कई बार जलभराव की स्थिति उत्पन्न हो जाती है। वहां के ग्रामीणों का कहना है कि पहले हम नदी के किनारे खेती करते थे, लेकिन अब हर साल एक बीघा ज़मीन गड्ढों में गिर जाती है। प्रशासन से लेकर खनिज विभाग तक कुछ नहीं कर रहा। सबको पता है कौन खनन कर रहा है, फिर भी कोई हल नहीं। अजीब यह है कि पोकलैंड मशीनें न सिर्फ पट्टे के निर्धारित क्षेत्र से बाहर, बल्कि नदी के बीचों-बीच काम कर रही हैं। इस अवैध गतिविधि के बावजूद न तो खनिज विभाग की टीमें कार्रवाई कर रही हैं, न ही पुलिस कोई टांग अड़ा रही है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि प्रशासन और खनन माफिया के बीच मिलीभगत चल रही है।
एक अधिकारी के अनुसार, “हमारे पास तमाम शिकायतें हैं, लेकिन जब टीम को भेजा जाता है तो मशीनें गायब हो जाती हैं। कहीं ऊपर से दबाव है, तो कहीं नीचे से डर। अधिकारी भी इंसान हैं, उन्हें पता है कि बदौसा खदान में जाना खतरे से कम नहीं। खनन माफिया का इतना रसूख है कि अधिकारी आधिकारिक जांच के दौरान भी वहां पहुंचने से पहले सोच-समझ कर चलते हैं। इस पूरे घमासान के बीच सवाल उठ रहे हैं कि जिम्मेदार अधिकारी जानकारी रखते हुए भी अवैध खनन क्यों नहीं रोक पा रहे हैं। क्या यूंही चलत रहे गा खनन माफियाओं का काला कारोबार
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