अवैध खनन, ओवरलोड परिवहन और जल-जंगल-जमीन के मुद्दे पर बबेरू विधायक विशंभर सिंह यादव का वक्तव्य
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Published - 14 June 2026 3 views
अवैध खनन, ओवरलोड परिवहन और जल-जंगल-जमीन के मुद्दे पर बबेरू विधायक विशंभर सिंह यादव का वक्तव्य
नेशनल न्यूज 1 बांदा रिपोर्ट संध्या
बाँदा जनपद मे आज समाजवादी पार्टी कार्यालय बिजली खेड़ा बांदा में अति संवेदनशील मुद्दा अवैध खनन, ओवर लोड,जल जंगल जमीन, के विषय में एक प्रेस वार्ता संपन्न हुई, बबेरू विधायक विशंभर सिंह यादव ने पत्रकारों से कहा,बीते मई में देश दुनिया के पैमाने पर बांदा जिला सबसे गर्म इलाका बना है। जिले का लगातार तीन दिन सबसे गर्म बने रहना चिंतित करता है,लोगों को असहनीय गर्मी से मुकाबिल होना पड़ा है। दरअसल, बेलगाम अवैध खनन ने हालात बदतर बना दिए हैं। नदियां मारी जा रही हैं। पहाड़ उड़ाए जा रहे हैं। सारा महापाप सत्ता के संरक्षण में हो रहा है। आरोप लगाया, धनलोलुप भाजपा सरकार के पालित पोषित ठेकेदार नियमों को ताक में रखकर निर्ममता से नदियों का सीना छलनी कर रहे हैं तो दूसरी ओर डायनामाइट से पहाड़ों के परखच्चे उड़ा रहे हैं। अवैध खनन ने भयंकर रूप ले लिया है। लेकिन, भाजपा सरकार बेफिक्र बनी हुई है।
सपा विधायक यादव ने पत्रकार वार्ता में कहा, भाजपा सरकार के संरक्षण में बांदा जिले का प्राकृतिक उत्पीड़न चरम पर है। पहले केन, बागेन, रंज, चंद्रावल आदि नदियों की लहराती जलराशि गर्म हवाओं से टकराकर लोगों की राहत का सबब बनती थी, अब नदियों से जल गायब है। कहीं सूखा तो कहीं नाला है। खननपापियों ने नदियों को कुरूप बना दिया है। कहने को, जिले की नदियों में तकरीबन 26 बालू खदानें संचालित हैं। लेकिन सौ के करीब अवैध खदानें भी गुलजार हैं। वैध खदानों में भी नियमों की धज्जियां उड़ती हैं। बेधड़क गरजती मशीनें दिन रात नदियों को मारने में आमादा हैं।उन्होंने कहा, यही स्थिति गिरवा और नरैनी इलाकों में पहाड़ों की है। डायनामाइट से पहाड़ उड़ाए जाते हैं। नदियों को मारने और पहाड़ों को उड़ाने के कुकृत्यों में शामिल चेहरों के पीछे छिपे असल चेहरों को चुल्लू भर पानी में डूब मरना चाहिए। इनके मनमाने खनन से बने गड्ढों में बच्चों के डूब मरने के दुखद मामले अक्सर सामने आते हैं। यह मामले सरकार को लानत भेजते हैं।बबेरू विधायक यादव ने अवैध खनन पर चर्चा के बीच वन विभाग को भी आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा, करीब 4,400 वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल के बांदा जिले में महज तीन फीसद वन क्षेत्र है। यह तब है जब हर साल लगभग 70 लाख पौधे रोपे जा रहेहैं। हर साल पौधारोपण का ढोल पीटा जाता है। लेकिन हासिल के नाम पर सिरे से निल बटा सन्नाटा दिखता है। इसकी जांच होनी चाहिए। लेकिन ऐसी मांगें सरकार में नक्कारखाने की तूती साबित होती हैं। विधायक यादव ने कहा, खनन आदि कारणों से दिख रहे दुष्प्रभाव का असर पैदावार चक्र में नजर आने लगा है। काम कारोबार के लिए लोग पलायन को मजबूर हैं।बबेरू से तीसरी बार विधायक चुने गए यादव ने कहा, सरकार के संरक्षण में नदियों का सीना चाक करने और पहाड़ों को जमींदोज करने का सिलसिला यदि यूं ही जारी रहा, परिणाम भयावह हो सकते हैं। जिले का देश दुनिया में सबसे गर्म इलाका बनना चिंताजनक आहट है। रेगिस्तान बनने से पहले चेतने की जरूरत है। सरकार इस ओर आंखें मूंदने के बजाय अवैध खनन के जिम्मेदारों और उनके अलमबरदारों पर शिकंजा कसे। उन्हें भी प्रिय शगल बनी बुलडोजर कार्रवाई से रूबरू कराए।बांदा सहित पूरे बंदेलखंड क्षेत्र में अंधाधुंध खनन, पेड़ों की कटाई और जल स्रोतों की अनदेखी जैसे कारणों से पर्यावरण संतुलन गंभीर रूप से बिगड़ चुका है। इसके परिणामस्वरूप भीषण गर्मी तापमान 49 डिग्री तक पहच जाना सामान्य हो गया है। गहराते जल संकट और उपजाऊ भूमि के बंजर होने का खतरा मंडरा रहा है। बांदा में प्रकृति से खिलवाड़ और उससे उपजे प्रमुख खतरों का प्रमुख कारण अनियंत्रित खनन और पहाड़ों का विनाश है। केन नदी में अवैध खनन उसके प्राकृतिक बहाव और पारिस्थितिकी तंत्र के साथ छेड़छाड़ की जा रही है। स्थानीय स्तर पर पहाड़ों और चट्टानों की अंधाधुंध कटाई से भूजल स्तर में भारी गिरावट आ रही है। अवैध खनन और तालाबों/पोखरों के अतिक्रमण के कारण बारिश का पानी सही से जमीन के अंदर नहीं जा पाता है। भीषण गर्मी के महीनों में नलकूप और हैंडपंप सूखने लगते हैं, जिससे बांदा के ग्रामीण व शहरी इलाकों में पानी के लिए हाहाकार मच जाता है। बांदा में अक्सर भीषण गर्मी के मौसम में तापमान 49 डिग्री सेल्सियस के पार रिकॉर्ड किया गया है, जो सीधे तौर पर पर्यावरण असंतुलन और कंक्रीट के बढ़ते प्रभाव को दर्शाता है। बढ़ते तापमान और हरियाली की कमी केकारण गर्म हवाओं का प्रभाव जानलेवा स्तर तक बढ़ जाता है। प्रकृति से हो रहे खिलवाड़ से जैव विविधता नष्ट हो रही है, जिसका सीधा असर स्थानीय कृषि पैदावार पर पड़ रहा है। कृषि और पानी की कमी के चलते स्थानीय निवासियों और किसानों को आजीविका की तलाश में मजबूरन पलायन करना पड़ रहा है। प्रकृति के इस असंतुलन को रोकने के लिए व्यापक स्तर पर वृक्षारोपण, तालाबों का संरक्षण और खनन माफियाओं पर कड़ी कार्रवाई की आवश्यकता है। पूर्व में बबेरू विधायक जी ने इस तरह की शिकायत जिला अधिकारी महोदय की जा चुकी है। क्षेत्र भ्रमण के दौरान मैंने देखा कि चरका खदान जो बबेरू क्षेत्र में स्थित है, उसमें खदान मालिक व संचालकों ने मरका से लेकर चरका तक नहर पटरी पर बनी पक्की सड़क पर दो-दो, तीन-तीन फिट मिट्टी डालकर रोड बाधित कर दिया, चरका से बीरा तक पक्की सड़क में दो-दो, तीन-तीन फिट मिट्टी डालकर पूरा रास्ता बाधित कर दिया, आने वाले समय में बरसात होगी, जिससे 15 से 20 गांवों का आवागमन बाधित हो जायेगा। पिछले वर्ष भी यही समस्या रही है। ग्रामीणों ने भ्रमण के दौरान शिकायत की, खदान का पट्टा एक जगह है। परन्तु कई जगह चरका में अवैध खनन चल रहा है। रास्ते से मिट्टी हटवाकर आम रास्ता सुचारू रूप से संचालित कराया जाये और अवैध खनन करने वालों के विरूद्ध सख्त कानूनी कार्यवाही की जाये। सीमांकन के बाहर अवैध खनन चल रहा है इस मौके लोक सभा प्रभारी उमेश यादव,यूजन सभा राष्ट्रीय सचिव ओम नारायण त्रिपाठी विदित,छात्र सभा राष्ट्रीय सचिव नि.जिला मीडिया प्रभारी/ प्रवक्ता प्रमोद गुप्ता राजा, मुमताज अली,वृंदावन वैश्य,राजकुमार गुप्ता राजू,वीरेंद्र गुप्ता बाबू, प्रियांशु गुप्ता,विद्यासागर तिवारी,नीलम गुप्ता छेदी लाल गुप्ता,अशोक गौर,आमिर खान मन्नी,निलेश श्रीवास,अशोक श्रीवास, विजय करण यादव,एजाज खान,रजनी यादव,लालमन यादव,प्रमोद निषाद,अबरार फारूकी,रहीस खान,मनी कश्यप
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