तहसीलदार न्यायालय में लेखपाल के पेशकार की भूमिका पर उठे सवाल अधिवक्ताओं में आक्रोश
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Published - 09 September 2026 294 views
तहसीलदार न्यायालय में लेखपाल के पेशकार की भूमिका पर उठे सवाल अधिवक्ताओं में आक्रोश
नेशनल न्यूज १रायबरेली रिपोर्ट -कपिल त्रिपाठी
सलोन, रायबरेली। दिनांक 08सितम्बर दिन मंगलवार को बिना सक्षम अधिकारी के आदेश के लेखपाल द्वारा पेशकार का कार्य किए जाने का आरोप, पत्रावलियों की सुरक्षा को लेकर अधिवक्ताओं ने आवाज उठाई है तहसील सलोन स्थित तहसीलदार न्यायालय में इन दिनों व्यवस्थाओं और कार्यप्रणाली को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। अधिवक्ताओं का आरोप है कि न्यायालय में नियमानुसार जिम्मेदारी तय होने के बावजूद एक लेखपाल द्वारा पेशकार का कार्य किया जा रहा है। अधिवक्ताओं का कहना है कि यदि किसी लेखपाल को बाकायदा सक्षम अधिकारी के आदेश के बिना न्यायालय के पेशकार का कार्य सौंपा गया है तो महत्वपूर्ण न्यायिक पत्रावलियों की सुरक्षा और उनकी निगरानी की जिम्मेदारी आखिर किसकी होगी?अधिवक्ताओं ने आरोप लगाया कि न्यायालय में राजस्व संबंधी महत्वपूर्ण पत्रावलियां रहती हैं, जिनमें भूमि विवाद, नामांतरण, कब्जे और अन्य राजस्व मामलों से संबंधित दस्तावेज शामिल होते हैं। ऐसे में पत्रावलियों के रखरखाव, अभिरक्षा और उनके न्यायालयीन उपयोग की जिम्मेदारी किसी अधिकृत कर्मचारी के पास होना जरूरी है। यदि निर्धारित व्यवस्था से इतर किसी कर्मचारी को यह जिम्मेदारी दी जा रही है तो इससे पारदर्शिता और जवाबदेही पर स्वाभाविक रूप से सवाल खड़े होते हैं,पत्रावलियों के गायब होने की आशंका ने बढ़ाई चिंताअधिवक्ताओं का कहना है कि न्यायालयीन पत्रावलियां अत्यंत महत्वपूर्ण दस्तावेज होती हैं। ऐसे में उनकी सुरक्षा में किसी भी प्रकार की लापरवाही भविष्य में गंभीर विवाद का कारण बन सकती है। अधिवक्ताओं ने सवाल उठाया कि यदि कोई महत्वपूर्ण पत्रावली गायब हो जाती है, उसमें छेड़छाड़ होती है अथवा दस्तावेजों के रखरखाव में अनियमितता सामने आती है तो उसकी जिम्मेदारी आखिर किस अधिकारी या कर्मचारी की तय होगी?
इसी को लेकर अधिवक्ताओं के बीच यह चर्चा भी तेज है कि कहीं न्यायालयीन कार्यप्रणाली में अनधिकृत हस्तक्षेप किसी विशेष व्यक्ति या पक्ष को लाभ पहुंचाने का माध्यम तो नहीं बन रहा। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और संबंधित अधिकारियों का पक्ष सामने आना अभी बाकी है।अधिवक्ताओं का आरोप है कि लेखपाल द्वारा पेशकार की भूमिका निभाने के कारण न्यायालय कीकार्यप्रणाली प्रभावित हो रही है। उनका कहना है कि कई मामलों में अधिवक्ताओं को आवश्यक जानकारी प्राप्त करने अथवा पत्रावलियों की स्थिति जानने में परेशानी का सामना करना पड़ता है। अधिवक्ताओं ने सवाल उठाया कि न्यायालय की व्यवस्था किसी व्यक्ति विशेष के नियंत्रण में नहीं बल्कि निर्धारित नियमों और पारदर्शी प्रक्रिया के तहत संचालित होनी चाहिए।वकीलों का आरोप है कि तहसील के कुछ लेखपालों की कार्यशैली ऐसी हो गई है कि वे अपने आपको सामान्य प्रशासनिक व्यवस्था से ऊपर समझने लगे हैं। हालांकि यह अधिवक्ताओं के आरोप हैं, जिनकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर फूटा अधिवक्ताओं का गुस्सा न्यायालयीन कार्यप्रणाली में कथित अनियमितताओं और भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर अधिवक्ताओं में नाराजगी बढ़ती जा रही है। अधिवक्ताओं का कहना है कि यदि तहसील स्तर पर ही न्यायिक एवं राजस्व कार्यों में पारदर्शिता नहीं रहेगी तो आम फरियादी को न्याय मिलने की उम्मीद कैसे कायम रहेगी।अधिवक्ताओं ने कहा कि राजस्व न्यायालयों में आने वाला अधिकांश व्यक्ति पहले से ही अपनी भूमि अथवा अधिकारों से जुड़े विवादों से परेशान होता है। ऐसे में यदि उसे पत्रावली, तारीख अथवा न्यायालयीन प्रक्रिया की जानकारी के लिए भी कर्मचारियों के चक्कर लगाने पड़ें तो व्यवस्था पर सवाल उठना स्वाभाविक है।जवाबदेही तय करने की मांगअधिवक्ताओं ने मांग की है कि तहसीलदार न्यायालय में पेशकार का कार्य कौन कर रहा है, उसे किस आदेश के तहत यह जिम्मेदारी दी गई है और न्यायालयीन पत्रावलियों की सुरक्षा एवं अभिरक्षा किस कर्मचारी के जिम्मे है—इन सभी बिंदुओं की स्पष्ट जांच कराई जाए।साथ ही अधिवक्ताओं ने कथित अनियमितताओं की उच्चस्तरीय जांच कराकर जिम्मेदारी तय करने और दोषी पाए जाने वाले कर्मचारियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई किए जाने की मांग की है।अधिवक्ताओं का कहना है कि यदि प्रशासन ने समय रहते मामले को गंभीरता से नहीं लिया तो वे अपने अधिकारों और न्यायालयीन व्यवस्था की पारदर्शिता के लिए आगे की लड़ाई लड़ने को मजबूर होंगे। फिलहाल मामले को लेकर तहसील परिसर में चर्चाओं का बाजार गर्म है और सभी की निगाहें जिम्मेदार अधिकारियों की कार्रवाई पर टिकी हैं।अब बड़ा सवाल यह है कि तहसीलदार न्यायालय में पेशकार का कार्य वास्तव में किस आदेश के तहत किया जा रहा है और न्यायालयीन पत्रावलियों की सुरक्षा की जिम्मेदारी किस अधिकारी अथवा कर्मचारी की है? इन सवालों का स्पष्ट जवाब सामने आने के बाद ही पूरे मामले की वास्तविक तस्वीर साफ हो सकेगी।
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