सुनने की समस्या की समय पर पहचान और उपचार जरूरी विशेषज्ञएम्स रायबरेली में अंतर्राष्ट्रीय बधिर सप्ताह पर जन-जागरूकता कार्यक्रम कॉक्लियर इम्प्लांट व हियरिंग रिहैबिलिटेशन सेवाओं की दी जानकारी
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Published - 24 September 2026 49 views
सुनने की समस्या की समय पर पहचान और उपचार जरूरी विशेषज्ञएम्स रायबरेली में अंतर्राष्ट्रीय बधिर सप्ताह पर जन-जागरूकता कार्यक्रम कॉक्लियर इम्प्लांट व हियरिंग रिहैबिलिटेशन सेवाओं की दी जानकारी
नेशनल न्यूज १रायबरेली रिपोर्ट: कपिल त्रिपाठी
रायबरेली 22सितंबर अंतर्राष्ट्रीय बधिर सप्ताह के अवसर पर एम्स रायबरेली के ईएनटी (कान, नाक एवं गला) विभाग की ओर से जन-जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस वर्ष कार्यक्रम की थीम “बधिर लोगों के मानवाधिकारों की घोषणा” रखी गई। कार्यक्रम का उद्देश्य मरीजों, उनके परिजनों और आमजन को सुनने की क्षमता में कमी की समय रहते पहचान, उचित उपचार तथा कम सुनने वाले व्यक्तियों के अधिकारों के प्रति जागरूक करना रहा।कार्यक्रम में एम्स रायबरेली की कार्यकारी निदेशक प्रो. (डॉ.) अमिता जैन ने कहा कि संस्थान सुनने और बोलने में कठिनाई वाले लोगों के लिए सुलभ, संवेदनशील और समावेशी स्वास्थ्य सेवा का वातावरण उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं तक समान पहुंच के साथ ही ऐसे व्यक्तियों के सामाजिक सम्मान और अधिकारों के प्रति जागरूकता भी जरूरी है।इस अवसर पर डॉ. नीरज श्रीवास्तव, प्रो. भोलानाथ और डॉ. श्रुति सिन्हा ने भी अपने विचार रखे। विशेषज्ञों ने कहा कि बच्चों और वयस्कों में सुनने की समस्या का यदि समय रहते पता लगा लिया जाए तो उचित चिकित्सकीय उपचार, श्रवण सहायता और पुनर्वास के माध्यम से उनकी दैनिक जीवन की क्षमताओं में महत्वपूर्ण सुधार किया जा सकता है।कार्यक्रम के दौरान ईएनटी विभाग की ओर से एम्स रायबरेली में उपलब्ध आधुनिक हियरिंग रिहैबिलिटेशन सेवाओं की जानकारी दी गई। गंभीर श्रवण क्षमता हानि वाले मरीजों के लिए कॉक्लियर इम्प्लांट से संबंधित जांच और पुनर्वास सुविधाओं के बारे में भी बताया गया।विशेषज्ञों ने समाज में बहरेपन और श्रवण अक्षमता को लेकर प्रचलित भ्रांतियों को दूर करने पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि सुनने की अक्षमता किसी व्यक्ति की शिक्षा, रोजगार, सामाजिक सहभागिता और सम्मानजनक जीवन के अधिकार में बाधा नहीं बननी चाहिए। समय पर पहचान, उपचार, पुनर्वास और परिवार व समाज के सहयोग से श्रवण बाधित लोगों को बेहतर अवसर उपलब्ध कराए जा सकते हैं।कार्यक्रम के माध्यम से लोगों से अपील की गई कि बच्चों अथवा वयस्कों में सुनने की क्षमता में कमी के लक्षण दिखाई देने पर इसे नजरअंदाज न करें और समय रहते विशेषज्ञ चिकित्सक से परामर्श लें।
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