विश्व पर्यावरण दिवस पर पौधरोपण: क्या अगले वर्ष तक जीवित रहेंगे लगाए गए पौधे
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Published - 06 June 2026 27 views
विश्व पर्यावरण दिवस पर पौधरोपण: क्या अगले वर्ष तक जीवित रहेंगे लगाए गए पौधे
नेशनल न्यूज १रायबरेली रिपोर्ट -कपिल त्रिपाठी
रायबरेली। विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर 5 जून को जनपद रायबरेली सहित प्रदेश भर में बड़े पैमाने पर पौधरोपण कार्यक्रम आयोजित किए गए। सरकारी विभागों, जनप्रतिनिधियों, सामाजिक संगठनों और विद्यालयों द्वारा हजारों पौधे लगाए गए। कार्यक्रमों में पर्यावरण संरक्षण, हरित आवरण बढ़ाने और जलवायु परिवर्तन से निपटने के संकल्प लिए गए। लेकिन हर वर्ष की तरह इस बार भी एक बड़ा सवाल लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है कि क्या आज लगाए गए पौधे अगले वर्ष विश्व पर्यावरण दिवस तक जीवित मिलेंगे? यदि मिलेंगे तो कितने, और यदि नहीं मिलेंगे तो इसके लिए जिम्मेदार कौन होगा?जेठ माह की भीषण गर्मी में किए गए पौधरोपण को लेकर पर्यावरण प्रेमियों और जागरूक नागरिकों ने चिंता व्यक्त की है। उनका कहना है कि केवल पौधा लगा देना ही पर्यावरण संरक्षण नहीं है, बल्कि उसकी नियमित देखभाल, सिंचाई और सुरक्षा अधिक महत्वपूर्ण है। अक्सर देखा जाता है कि कार्यक्रम समाप्त होने के बाद अधिकांश पौधे उपेक्षा का शिकार हो जाते हैं और कुछ ही महीनों में सूख जाते हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार जून माह में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस से ऊपर पहुंच जाता है। ऐसे में यदि पौधों को पर्याप्त पानी और संरक्षण न मिले तो उनके जीवित रहने की संभावना काफी कम हो जाती है। कई बार पौधरोपण केवल लक्ष्य पूर्ति और फोटो सत्र तक सीमित रह जाता है, जिसके कारण सरकारी धन, समय और संसाधनों का अपेक्षित लाभ नहीं मिल पाता।पौधरोपण की सही विधि क्या है?पर्यावरण विशेषज्ञ बताते हैं कि सफल पौधरोपण के लिए कुछ आवश्यक बातों का पालन करना चाहिए—पौधा लगाने के लिए कम से कम 1 से 1.5 फीट गहरा गड्ढा तैयार किया जाए।गड्ढे में उपजाऊ मिट्टी के साथ गोबर की खाद या जैविक खाद मिलाई जाए।पौधे को सीधा लगाकर उसकी जड़ों को अच्छी तरह मिट्टी से ढका जाए।पौधरोपण के तुरंत बाद पर्याप्त सिंचाई की जाए।पौधे के चारों ओर ट्री गार्ड या बाड़ लगाई जाए ताकि पशुओं से सुरक्षा मिल सके।गर्मी के मौसम में नियमित अंतराल पर पानी देना अनिवार्य है।प्रत्येक पौधे की जिम्मेदारी किसी व्यक्ति, संस्था या विभाग को सौंपी जाए।केवल पौधरोपण नहीं, संरक्षण भी जरूरी पर्यावरणविदों का मानना है कि यदि लगाए गए पौधों की छह माह से एक वर्ष तक नियमित निगरानी की जाए तो उनकी जीवित रहने की दर काफी बढ़ सकती है। वहीं बिना देखभाल के अधिकांश पौधे सूख जाते हैं। इसलिए पौधरोपण अभियान की सफलता का आकलन लगाए गए पौधों की संख्या से नहीं, बल्कि एक वर्ष बाद जीवित बचे पौधों की संख्या से होना चाहिए।जनता के बीच उठ रहे सवाल रायबरेली जिले में विश्व पर्यावरण दिवस पर विभिन्न स्थानों पर लगाए गए पौधों को लेकर नागरिकों के बीच कई सवाल चर्चा में हैं। लोग जानना चाहते हैं कि अगले वर्ष 5 जून को इन पौधों की वास्तविक स्थिति क्या होगी? क्या संबंधित विभाग इनके संरक्षण की जिम्मेदारी निभाएंगे? क्या पौधों की निगरानी होगी या फिर यह अभियान केवल औपचारिकता बनकर रह जाएगा?पर्यावरण संरक्षण की दिशा में पौधरोपण एक सराहनीय पहल है, लेकिन इसकी वास्तविक सफलता तभी मानी जाएगी जब आज लगाए गए पौधे आने वाले वर्षों में विशाल वृक्ष बनकर पर्यावरण और समाज को लाभ पहुंचाएं। अन्यथा हर वर्ष पौधे लगाना और कुछ महीनों बाद उनका सूख जाना केवल एक औपचारिकता बनकर रह जाएगा, जिससे पर्यावरण संरक्षण का उद्देश्य अधूरा रह जाएगा।
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