मुख्यमंत्री के दौरे से चमकी रायबरेली सवाल काश छह महीने में एक बार ऐसे ही दौरा करते सीएम
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Published - 24 August 2026 105 views
मुख्यमंत्री के दौरे से चमकी रायबरेली सवाल काश छह महीने में एक बार ऐसे ही दौरा करते सीएम
नेशनल न्यूज १रायबरेली रिपोर्ट कपिल त्रिपाठी
रायबरेली। ज़िले में अफसरों की मेहमाननवाजी छोड़ तहसील और ग्रामीण क्षेत्रों का निरीक्षण करें मुख्यमंत्री तो सामने आए जिले की असली तस्वीर,मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के प्रस्तावित दौरे को लेकर जिले का प्रशासनिक अमला पूरी तरह सक्रिय नजर आ रहा है। जिन सड़कों, चौराहों और सार्वजनिक स्थलों पर लंबे समय से गंदगी, टूट-फूट और बदहाली दिखाई देती थी, वहां अचानक साफ-सफाई, मरम्मत और रंग-रोगन का काम तेज हो गया है। मुख्यमंत्री के काफिले के संभावित मार्गों को दुरुस्त करने में अधिकारी दिन-रात जुटे हुए हैं। ऐसे में आम लोगों के बीच यह सवाल भी उठ रहा है कि काश मुख्यमंत्री छह महीने या साल में एक बार इसी तरह जिले का दौरा करते रहते, तो शायद रायबरेली की तस्वीर इतनी बदहाल न होती।मुख्यमंत्री के दौरे ने प्रशासनिक मशीनरी की सक्रियता जरूर बढ़ा दी है, लेकिन इस सक्रियता ने उन सवालों को भी जन्म दिया है, जो लंबे समय से आम लोगों के बीच उठते रहे हैं। लोगों का कहना है कि वीआईपी दौरे से पहले सड़कें चमकने लगती हैं, नालियां साफ हो जाती हैं और व्यवस्थाएं दुरुस्त दिखाई देने लगती हैं, लेकिन दौरा समाप्त होते ही अक्सर वही पुरानी स्थिति लौट आती है।
तहसील और ग्रामीण क्षेत्रों का भी हो औचक निरीक्षण
यदि मुख्यमंत्री निर्धारित कार्यक्रम स्थलों के साथ-साथ किसी तहसील, ब्लॉक कार्यालय, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, थाना, ग्राम पंचायत या ग्रामीण क्षेत्र का अचानक निरीक्षण करें तो जिले की जमीनी हकीकत कहीं अधिक स्पष्ट सामने आ सकती है। तहसीलों और थानों में अपनी शिकायतें लेकर पहुंचने वाले फरियादियों की समस्याएं, लंबित प्रकरण, ग्रामीण सड़कों की स्थिति, जलभराव, सफाई व्यवस्था और सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन की वास्तविक तस्वीर सीधे मुख्यमंत्री के सामने आ सकती है।
आम नागरिकों का मानना है कि अधिकारियों द्वारा तैयार कराई गई रिपोर्ट और धरातल की स्थिति में अंतर को समझने का सबसे बेहतर तरीका औचक निरीक्षण ही है। यदि मुख्यमंत्री बिना पूर्व सूचना किसी गांव में पहुंचकर ग्रामीणों से सीधे संवाद करें तो सरकारी योजनाओं की सफलता और दावों की वास्तविकता दोनों सामने आ सकती हैं।काफिले के रूट पर सजती व्यवस्था, बाकी जिले का क्या?मुख्यमंत्री के दौरे को लेकर जिन मार्गों से उनका काफिला गुजरना प्रस्तावित है, वहां व्यवस्था दुरुस्त करने में प्रशासन जुटा है। इससे यह सवाल भी उठ रहा है कि यदि इन सड़कों की मरम्मत और साफ-सफाई समय रहते होती रहती तो वीआईपी दौरे के समय आनन-फानन में व्यवस्थाएं सुधारने की जरूरत ही क्यों पड़ती?
जिले के कई हिस्सों में सड़क, नाली, जलभराव और साफ-सफाई जैसी समस्याएं लगातार लोगों की परेशानी का कारण बनी हुई हैं। ऐसे में मुख्यमंत्री के दौरे के दौरान केवल तय रूट और कार्यक्रम स्थल को चमकाने के बजाय जिले के अन्य क्षेत्रों की स्थिति पर भी ध्यान दिया जाना जरूरी है।कागज पर विकास चंगा, हकीकत में नंगा!,रायबरेली में विकास कार्यों को लेकर सरकारी स्तर पर तमाम दावे किए जाते हैं। जिले में नौ नगर पंचायत, एक नगर पालिका परिषद और 989 ग्राम पंचायतें हैं। इतनी बड़ी ग्रामीण और शहरी प्रशासनिक व्यवस्था के बीच करोड़ों रुपये की विकास योजनाएं संचालित होती हैं। सड़क, नाली, इंटरलॉकिंग, जल निकासी, स्वच्छता, पेयजल और अन्य मूलभूत सुविधाओं पर लगातार धन खर्च होने के बावजूद कई स्थानों पर जमीनी तस्वीर सवाल खड़े करती है।हालांकि, विकास कार्यों में घपले या भ्रष्टाचार की प्रत्येक शिकायत को जांच के बाद ही प्रमाणित माना जा सकता है। बावजूद इसके, जहां काम की गुणवत्ता पर सवाल उठते हैं या सरकारी धन खर्च होने के बाद भी समस्या जस की तस बनी रहती है, वहां पारदर्शी जांच और जिम्मेदारी तय किए जाने की जरूरत है।थाना-तहसील में फरियादियों की लंबी कतार ,ग्रामीण क्षेत्रों में आम लोगों की सबसे बड़ी शिकायतों में थाना और तहसील स्तर पर समस्याओं का समय से समाधान न होना भी शामिल है। जमीन, रास्ते, राजस्व, पुलिस कार्रवाई और आपसी विवादों से जुड़े मामलों को लेकर लोग बार-बार सरकारी कार्यालयों के चक्कर लगाने को मजबूर होते हैं। ऐसे में यदि मुख्यमंत्री सीधे फरियादियों से संवाद करें तो अधिकारियों की कार्यशैली और शिकायत निस्तारण की वास्तविक स्थिति का भी पता चल सकता है।
मुख्यमंत्री के दौरे ने फिलहाल जिले की सरकारी मशीनरी को सक्रिय कर दिया है। लेकिन असली परीक्षा यह होगी कि दौरा समाप्त होने के बाद भी यही सक्रियता कितने समय तक कायम रहती है।
जनता की उम्मीद यही है कि मुख्यमंत्री का दौरा केवल स्वागत, समीक्षा बैठकों और निर्धारित कार्यक्रमों तक सीमित न रहे, बल्कि गांव की पगडंडी से लेकर थाना-तहसील और सरकारी कार्यालयों तक पहुंचे। तभी कागजों पर दर्ज विकास और जमीन पर दिखाई देने वाले विकास के बीच का अंतर सामने आ सकेगा।
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