सपा छोड़ पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष मोहन साहू ने थामा कांग्रेस का हाथ, बांदा में 2027 के टिकट को लेकर सियासी हलचल तेज
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Published - 08 September 2026 3 views
सपा छोड़ पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष मोहन साहू ने थामा कांग्रेस का हाथ, बांदा में 2027 के टिकट को लेकर सियासी हलचल तेज
नेशनल न्यूज 1 बांदा रिपोर्ट संध्या
मोहन साहू के कांग्रेस में शामिल होते ही टिकट के दावेदारों की बढ़ी कतार, पुराने कांग्रेसियों के सामने भी चुनौती
बांदा। उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव को लेकर सियासी सरगर्मियां तेज हो गई हैं। इसी बीच बांदा नगर पालिका के पूर्व चेयरमैन मोहन साहू ने समाजवादी पार्टी से नाता तोड़कर कांग्रेस का दामन थाम लिया है। लखनऊ में कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अजय राय ने उन्हें पार्टी की सदस्यता दिलाई।
मोहन साहू के कांग्रेस में शामिल होने के बाद बांदा की बांदा सदर और नरैनी विधानसभा सीटों को लेकर राजनीतिक चर्चाएं और तेज हो गई हैं। राजनीतिक गलियारों में उनके इस कदम को 2027 के चुनावी समीकरण से जोड़कर देखा जा रहा है।
चर्चा है कि मोहन साहू लंबे समय से बांदा सदर विधानसभा सीट से सपा के टिकट की दावेदारी कर रहे थे। अब कांग्रेस में उनकी एंट्री के बाद यह सवाल भी उठने लगा है कि क्या वह कांग्रेस के संभावित प्रत्याशी के तौर पर अपनी दावेदारी पेश करेंगे।
वहीं, सपा-कांग्रेस गठबंधन और सीटों के संभावित बंटवारे को लेकर भी तरह-तरह के कयास लगाए जा रहे हैं। हालांकि, सीटों के बंटवारे और गठबंधन को लेकर अभी कोई आधिकारिक घोषणा सामने नहीं आई है। इसके बावजूद राजनीतिक जानकार संभावित चुनावी समीकरणों को लेकर अपने-अपने कयास लगा रहे हैं।
मोहन साहू के कांग्रेस में आने के साथ ही बांदा में कांग्रेस के टिकट के संभावित दावेदारों की चर्चा भी तेज हो गई है। बताया जा रहा है कि आधा दर्जन से अधिक नेता, पूर्व विधायक के पुत्र और दो पूर्व ब्लॉक प्रमुख भी कांग्रेस से संपर्क में हैं और 2027 में टिकट की दावेदारी को लेकर सक्रिय हैं।
हालांकि, बाहरी नेताओं की कांग्रेस में बढ़ती एंट्री के बीच पार्टी के पुराने और जमीनी कार्यकर्ताओं के सामने भी बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। कांग्रेस नेतृत्व लगातार संगठन को मजबूत करने और बूथ स्तर तक सक्रिय कार्यकर्ताओं को आगे बढ़ाने की बात करता रहा है। ऐसे में दूसरे दलों से आने वाले नेताओं और वर्षों से संगठन के लिए काम कर रहे पुराने कार्यकर्ताओं के बीच टिकट को लेकर प्रतिस्पर्धा बढ़ना तय माना जा रहा है।
बांदा में संगठन सृजन अभियान के दौरान पार्टी नेतृत्व की ओर से बांदा सदर और नरैनी विधानसभा क्षेत्रों का फीडबैक भी लिया गया था। ऐसे में अब मोहन साहू के कांग्रेस में शामिल होने के बाद पार्टी के अंदर टिकट को लेकर नई चर्चाएं शुरू हो गई हैं।
सबसे बड़ा सवाल यही है कि 2027 के चुनाव में कांग्रेस नए चेहरों और दूसरे दलों से आए नेताओं पर भरोसा करेगी या वर्षों से संगठन के लिए संघर्ष कर रहे जमीनी कार्यकर्ताओं को प्राथमिकता देगी?
फिलहाल मोहन साहू की कांग्रेस में एंट्री ने बांदा की सियासत में हलचल जरूर बढ़ा दी है। अब निगाहें इस बात पर रहेंगी कि 2027 के चुनाव में कांग्रेस का टिकट वितरण किन समीकरणों पर होता है और बांदा सदर व नरैनी में पार्टी किस चेहरे पर दांव लगाती है।
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