कस्बा से ग्रामीण क्षेत्रों तक झोलाछापों का मकड़जाल मेडिकल स्टोरों की आड़ में चल रहे कथित क्लीनिक
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Published - 11 September 2026 3 views
कस्बा से ग्रामीण क्षेत्रों तक झोलाछापों का मकड़जाल मेडिकल स्टोरों की आड़ में चल रहे कथित क्लीनिक
नेशनल न्यूज १रायबरेली रिपोर्ट -कपिल त्रिपाठी
सलोन,रायबरेली। कहीं लकड़ी की बेंच पर मरीजों को चढ़ाई जा रही ग्लूकोज की बोतल तो कहीं भर्ती और छोटे-मोटे ऑपरेशन के आरोप, स्वास्थ्य विभाग की कार्रवाई पर उठ रहे हैं। सलोन तहसील क्षेत्र में कथित झोलाछाप चिकित्सकों और अवैध रूप से संचालित क्लीनिकों का जाल फैलने के आरोप लगातार सामने आ रहे हैं। आरोप है कि कस्बे से लेकर ग्रामीण अंचलों तक कई स्थानों पर परचून की दुकानों की तरह क्लीनिक संचालित किए जा रहे हैं, जबकि कुछ मेडिकल स्टोरों की आड़ में मरीजों को भर्ती करने से लेकर उपचार और छोटे-मोटे ऑपरेशन तक किए जाने की शिकायतें हैं। इन गतिविधियों को लेकर स्वास्थ्य विभाग की कार्यशैली पर भी सवाल खड़े किए जा रहे हैं।स्थानीय लोगों के अनुसार सलोन-जगतपुर मार्ग स्थित सेधिया पुर में शिवगुरु फार्मा एंड क्लीनिक नाम से संचालित प्रतिष्ठान में कथित रूप से सुबह से शाम तक मरीजों की आवाजाही रहती है। आरोप है कि यहां मरीजों को अंदर लकड़ी की बेंच पर लिटाकर ग्लूकोज चढ़ाने के साथ विभिन्न प्रकार का उपचार किया जाता है। स्थानीय स्तर पर छोटे-मोटे ऑपरेशन किए जाने के आरोप भी लगाए जा रहे हैं। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
बताया जाता है कि सलोन कस्बे से लेकर जगतपुर मार्ग के सेधिया पुर, मटका पूरे जोधी, बरुआ चौराहा, पारी, धरई, पनाह नगर, उमरी, बगहा, रेवली और करहिया बाजार सहित आसपास के क्षेत्रों में कथित रूप से कई झोलाछाप चिकित्सकों के ठिकाने संचालित हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि इनमें से कुछ स्थानों पर बिना पर्याप्त चिकित्सकीय योग्यता और आवश्यक अनुमति के मरीजों का उपचार किया जा रहा है।मेडिकल स्टोर की आड़ में मरीजों की भर्ती का आरोप हैं कमालगंज चौराहे पर स्थित वर्मा फार्मेसी को लेकर भी स्थानीय स्तर पर गंभीर आरोप लगाए जा रहे हैं। आरोप है कि यहां मरीजों को महंगे दामों पर खुली दवाओं की पुड़िया बनाकर दी जाती हैं। इसके अलावा दुकान के अंदर कमरे में मरीजों को भर्ती करने और छोटे-मोटे ऑपरेशन किए जाने की भी शिकायतें सामने आई हैं। इन आरोपों की भी संबंधित विभाग से जांच कराया जाना आवश्यक बताया जा रहा है।
कमालगंज चौराहे से करीब डेढ़ सौ मीटर दूर धरई रोड पर स्थित एक आयुर्वेदिक मेडिकल स्टोर को लेकर भी आरोप है कि उसके अंदर कथित रूप से क्लीनिक अथवा अस्पताल जैसी गतिविधियां संचालित हो रही हैं। स्थानीय लोगों का दावा है कि यहां प्रसव कराने से लेकर विभिन्न प्रकार के उपचार किए जाने की शिकायतें हैं।कई मेडिकल स्टोरों पर भी सवाल उठ रहे है। कमालगंज मुख्य मार्ग स्थित गौरव मेडिकल स्टोर, लालापुर चौराहा स्थित अखिलेश मेडिकल स्टोर और गणेशगंज बाजार स्थित सत्यम मेडिकल स्टोर को लेकर भी स्थानीय स्तर पर आरोप लगाए जा रहे हैं कि यहां दवाओं की बिक्री के साथ कथित रूप से झोलाछाप चिकित्सकों द्वारा मरीजों का उपचार किया जाता है। आरोप है कि कुछ स्थानों पर मेडिकल स्टोर के अंदर ही मरीजों को देखने और भर्ती करने जैसी गतिविधियां संचालित होती हैं।कार्रवाई के बजाय चुप्पी क्यों?
सबसे बड़ा सवाल स्वास्थ्य विभाग की निगरानी व्यवस्था को लेकर खड़ा हो रहा है। यदि क्षेत्र में बिना पंजीकरण या आवश्यक चिकित्सकीय अनुमति के क्लीनिक संचालित हो रहे हैं और मरीजों को भर्ती कर उपचार अथवा ऑपरेशन किए जा रहे हैं तो संबंधित विभाग द्वारा इन प्रतिष्ठानों की जांच क्यों नहीं की जा रही है? वहीं यदि आरोप निराधार हैं तो स्वास्थ्य विभाग को जांच कर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।स्थानीय लोगों का कहना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में गरीब और अशिक्षित मरीज अक्सर सस्ता उपचार मिलने की उम्मीद में ऐसे कथित चिकित्सकों के पास पहुंच जाते हैं। किसी आपात स्थिति में इलाज गलत होने पर मरीज की जान तक जोखिम में पड़ सकती है। ऐसे में बिना योग्यता अथवा निर्धारित मानकों के उपचार किए जाने की शिकायतों को गंभीरता से लिया जाना जरूरी है।जांच हुई तो हकीकत सामने आ सकती है। सलोन ब्लॉक क्षेत्र के विभिन्न गांवों और बाजारों में कथित रूप से फैले झोलाछापों के नेटवर्क की व्यापक जांच की मांग उठ रही है। लोगों का कहना है कि स्वास्थ्य विभाग को केवल कागजी कार्रवाई तक सीमित रहने के बजाय मेडिकल स्टोरों, क्लीनिकों और निजी उपचार केंद्रों का स्थलीय निरीक्षण कर यह पता लगाना चाहिए कि कौन चिकित्सकीय रूप से अधिकृत है और कौन बिना आवश्यक अनुमति के मरीजों का उपचार कर रहा है।
फिलहाल क्षेत्र में लगाए जा रहे इन गंभीर आरोपों की स्वतंत्र एवं आधिकारिक पुष्टि होना बाकी है। अब देखना यह है कि स्वास्थ्य विभाग इन शिकायतों को कितनी गंभीरता से लेता है और कथित अवैध क्लीनिकों तथा झोलाछाप चिकित्सकों के विरुद्ध जांच एवं कार्रवाई कब शुरू होती है।
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