बांदा सदर में सपा का ‘वैश्य दांव टिकट की मांग तेज
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Published - 11 September 2026 14 views
बांदा सदर में सपा का ‘वैश्य दांव टिकट की मांग तेज
नेशनल न्यूज 1 बांदा रिपोर्ट संध्या
कायस्थ-ब्राह्मण-ठाकुर प्रयोग के बाद अब वैश्य चेहरे पर निगाहें, श्यामा चरण गुप्ता की लोकसभा जीत को बनाया जा रहा आधार
बांदा। बांदा सदर विधानसभा सीट पर समाजवादी पार्टी के संभावित टिकट को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। वैश्य शक्ति संगठन और समाज के समर्थकों की ओर से इस बार वैश्य समाज को प्रतिनिधित्व देने की मांग जोर पकड़ रही है। समर्थकों का दावा है कि सदर विधानसभा क्षेत्र में वैश्य समाज की बड़ी आबादी है। ऐसे में पार्टी को इस वर्ग से मजबूत और जनाधार वाले चेहरे को मौका देना चाहिए।
सपा के पिछले विधानसभा चुनावों में अलग-अलग सामाजिक समीकरणों के तहत कायस्थ समाज से जमुना प्रसाद बोस, ब्राह्मण समाज से अमिता वाजपेयी और ठाकुर समाज से मंजुला विवेक सिंह को चुनाव मैदान में उतारा गया। हालांकि ये प्रयोग पार्टी के लिए अपेक्षित परिणाम नहीं ला सके। अब समर्थक इसे आधार बनाकर पार्टी से इस बार रणनीति बदलने की मांग कर रहे हैं।
श्यामा चरण गुप्ता की जीत का दिया जा रहा उदाहरण
वैश्य समाज के समर्थक सपा के पुराने लोकसभा प्रयोग का भी हवाला दे रहे हैं। बांदा-चित्रकूट लोकसभा सीट से श्यामा चरण गुप्ता को सपा ने प्रत्याशी बनाया था और उन्होंने चुनाव में जीत दर्ज की थी। समर्थकों का तर्क है कि यदि वैश्य चेहरे पर भरोसा कर लोकसभा में सफलता हासिल की जा सकती है तो बांदा सदर विधानसभा में भी इस सामाजिक समीकरण को आजमाया जा सकता है।
अयोध्यावासी वैश्य चेहरे की मांग
बांदा में अयोध्यावासी वैश्य समाज को राजनीतिक प्रतिनिधित्व देने की मांग भी चर्चा में है। समर्थकों का कहना है कि स्थानीय स्तर पर मजबूत पकड़, समाज में स्वीकार्यता और संगठन को साथ लेकर चलने वाले वैश्य चेहरे को मौका मिलने पर सदर सीट का चुनावी समीकरण बदल सकता है।
हालांकि केवल जातीय समीकरण चुनावी जीत की गारंटी नहीं होता। प्रत्याशी की व्यक्तिगत लोकप्रियता, संगठन की सक्रियता, बूथ स्तर की मजबूती और सभी वर्गों में स्वीकार्यता भी महत्वपूर्ण होगी। ऐसे में सपा के सामने चुनौती ऐसे चेहरे के चयन की होगी, जो अपने समाज के साथ-साथ अन्य वर्गों में भी प्रभाव बना सके।
फिलहाल सपा ने बांदा सदर सीट से प्रत्याशी की घोषणा नहीं की है, लेकिन टिकट को लेकर दावेदारों और समर्थकों की सक्रियता ने सियासी बाजार गर्म कर दिया है। अब देखना होगा कि पार्टी पुराने सामाजिक समीकरणों पर भरोसा करती है या इस बार वैश्य समाज के चेहरे पर दांव लगाकर नया चुनावी प्रयोग करती है।
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