तेजाब से पेट का रास्ता हुआ था बंद उम्मीद से लौटी जिंदगी: एम्स रायबरेली के डॉक्टरों ने दूरबीन विधि से बनाया खाने का रास्ता चार महीने बाद खाया मुंह से खाना
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Published - 01 October 2026 7 views
तेजाब से पेट का रास्ता हुआ था बंद उम्मीद से लौटी जिंदगी: एम्स रायबरेली के डॉक्टरों ने दूरबीन विधि से बनाया खाने का रास्ता चार महीने बाद खाया मुंह से खाना
नेशनल न्यूज 1 रायबरेली रिपोर्ट माया लक्ष्मी
रायबरेली: एम्स रायबरेली के जनरल सर्जरी विभाग ने एक गंभीर और जटिल पेट की बीमारी से जूझ रहे 16 वर्षीय युवक का दूरबीन (लैप्रोस्कोपिक/की-होल) विधि से सफल इलाज कर एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है।
मुरार मऊ, ऊँचाहार, रायबरेली के रहने वाले 16 वर्षीय युवक ने लगभग चार महीने पहले तेजाब पी लिया था। इसके कारण उसके पेट के निचले हिस्से में गंभीर सिकुड़न हो गई थी, जिससे खाना पेट से आगे जाने में बहुत कठिनाई हो रही थी। उसकी स्थिति इतनी गंभीर हो गई थी कि वह मुँह से खाना खाने में असमर्थ था। उसे एक पाइप के माध्यम से सीधे छोटी आंत में भोजन दिया जा रहा था।
युवक और उसके परिवार के लिए पिछले कुछ महीने बहुत अधिक शारीरिक और मानसिक तनाव से भरे रहे। परिवार लगातार इस चिंता में था कि उनका बच्चा कब दोबारा सामान्य रूप से मुँह से खाना खा पाएगा। 27 जुलाई 2026 को एम्स रायबरेली के जनरल सर्जरी विभाग की यूनिट-1 ने इस चुनौतीपूर्ण मामले की सर्जरी की। टीम ने दुर्बीन विधि से पेट को छोटी आंत से जोड़ने का जटिल ऑपरेशन सफलतापूर्वक किया, जिससे अब भोजन सामान्य रूप से आगे जा सकता है।
ऑपरेशन के बाद युवक अब मुँह से खाना खाने में सक्षम है। उसके स्वास्थ्य में लगातार सुधार हो रहा है, उसका वजन भी उचित रूप से बढ़ रहा है और वर्तमान में उसे मुँह से खाना खाने में कोई विशेष परेशानी नहीं हो रही है। सफल इलाज से सूर्यांश और उसके परिवार को बड़ी राहत मिली है और उनके चेहरे पर खुशी वापस आई है।
इस महत्वपूर्ण उपलब्धि पर एम्स रायबरेली की निदेशक डॉ. अमृता जैन ने टीम की सराहना की। उन्होंने डॉ. नीरज कुमार श्रीवास्तव के नेतृत्व में जनरल सर्जरी यूनिट-1 को इस जटिल ऑपरेशन की सफलता के लिए बधाई दी। उन्होंने ऑपरेशन में शामिल डॉ. प्रणभ कुशवाहा, डॉ. अमृतांशु सौरभ और डॉ. शिरीष कुमार, सहित डॉ. योगेश (सीनियर रेजिडेंट) और डॉ. हिमांशु (जूनियर रेजिडेंट) के समर्पण, मेहनत और टीमवर्क की भी सराहना की। एनेस्थीसिया टीम के डॉ. गिरीश, डॉ. अंजू (सीनियर रेजिडेंट) और डॉ. देवी (जूनियर रेजिडेंट), और नर्सिंग ऑफिसर सुप्रिया और प्रिया ने भी ऑपरेशन को सफलतापूर्वक पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
डॉ. अमिता जैन ने पूरी टीम को बधाई देते हुए कहा कि एम्स रायबरेली का जनरल सर्जरी विभाग भविष्य में भी आधुनिक दुर्बीन तकनीक की मदद से ऐसी जटिल सर्जरी करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। इसका उद्देश्य मरीजों को उनके घर के नजदीक ही आधुनिक और बेहतर सर्जिकल उपचार उपलब्ध कराना है, ताकि रायबरेली और आसपास के लोगों को जटिल इलाज के लिए दूर-दराज के बड़े शहरों में न जाना पड़े।
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