रिहायशी इलाके में LPG का गोदाम, खतरे में हजारों की जिंदगी
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Published - 06 October 2026 59 views
रिहायशी इलाके में LPG का गोदाम, खतरे में हजारों की जिंदगी
शिकायत के बाद भी खामोश प्रशासन पर अधिवक्ता दिनेश सिंह ने उठाए सवाल
नेशनल न्यूज 1 रायबरेली रिपोर्ट माया लक्ष्मी मिश्रा
रायबरेली। शहर के बीचोंबीच घनी आबादी वाले रिहायशी इलाके में LPG गैस सिलेंडरों के गोदाम के संचालन को लेकर जनसुरक्षा का बेहद गंभीर मामला सामने आया है। सिविल लाइंस स्थित 551, सिविल लाइंस, रायबरेली में संचालित समृद्धि गैस एजेंसी के LPG गोदाम को लेकर एडवोकेट दिनेश सिंह, सिविल कोर्ट रायबरेली ने जिलाधिकारी को प्रार्थना-पत्र देकर प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उनका कहना है कि यदि आवासीय क्षेत्र में ज्वलनशील गैस सिलेंडरों के भंडारण और आवागमन से सुरक्षा संबंधी खतरा है तो किसी बड़े हादसे का इंतजार करने के बजाय प्रशासन को समय रहते जांच और कार्रवाई करनी चाहिए।
अधिवक्ता दिनेश सिंह ने आरोप लगाया है कि उक्त गोदाम घनी आबादी वाले आवासीय क्षेत्र में स्थित है और उसके आसपास बड़ी संख्या में मकान हैं। यहां प्रतिदिन LPG सिलेंडरों का भंडारण, लोडिंग और अनलोडिंग होती है। ऐसे में गैस रिसाव, आग लगने अथवा किसी अन्य आकस्मिक घटना की स्थिति में इसका प्रभाव केवल गोदाम तक सीमित रहने की गारंटी नहीं दी जा सकती। शिकायतकर्ता ने सवाल उठाया है कि आखिर ऐसी स्थिति में आसपास रहने वाले आम नागरिकों की सुरक्षा की जिम्मेदारी किसकी है और क्या किसी गंभीर हादसे के बाद ही प्रशासन जागेगा?
मामले को और गंभीर बताते हुए अधिवक्ता दिनेश सिंह ने गोदाम के आसपास पेट्रोल पंप की मौजूदगी का भी उल्लेख किया है। उनका कहना है कि एक ओर LPG जैसी अत्यंत ज्वलनशील सामग्री का भंडारण और दूसरी ओर आसपास पेट्रोलियम उत्पादों से जुड़ी गतिविधि होने की स्थिति में अग्नि सुरक्षा के सभी पहलुओं की गंभीरता से जांच आवश्यक है। उन्होंने प्रशासन से यह स्पष्ट करने की मांग की है कि संबंधित परिसर में LPG भंडारण के लिए सभी आवश्यक लाइसेंस, अनुमतियां, NOC, निर्धारित क्षमता और सुरक्षा इंतजाम मौजूद हैं अथवा नहीं।
अधिवक्ता दिनेश सिंह ने अपने प्रार्थना-पत्र में हाल की आग और विस्फोट की घटनाओं का हवाला देते हुए प्रशासन को आगाह किया है कि ज्वलनशील पदार्थों से जुड़े मामलों में लापरवाही की कीमत आम जनता को अपनी जान और संपत्ति से चुकानी पड़ सकती है। उन्होंने अप्रैल 2026 में लखनऊ में हुई भीषण आग की घटना का उल्लेख किया है, जिसमें समाचार रिपोर्टों के अनुसार बड़ी संख्या में झुग्गियां प्रभावित हुई थीं और LPG सिलेंडरों के फटने से आग ने भयावह रूप ले लिया था। वहीं अगस्त 2026 में कौशाम्बी में हुई विस्फोट की घटना का भी उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा है कि ऐसी घटनाएं प्रशासन के लिए चेतावनी हैं कि ज्वलनशील पदार्थों के भंडारण और संचालन वाले स्थानों की सुरक्षा व्यवस्था की समय रहते जांच की जाए।
सबसे गंभीर सवाल प्रशासन की कथित निष्क्रियता को लेकर उठाया गया है। अधिवक्ता दिनेश सिंह के अनुसार, उन्होंने 17 सितंबर 2026 को जिलाधिकारी रायबरेली, जिला आपूर्ति कार्यालय, उप-मंडल मजिस्ट्रेट रायबरेली तथा PESO क्षेत्रीय कार्यालय, संयुक्त मुख्य विस्फोटक नियंत्रक, आगरा को रजिस्टर्ड डाक के माध्यम से शिकायत भेजी थी, लेकिन उनके अनुसार अब तक मामले में अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई है। शिकायतकर्ता ने सवाल उठाया है कि जब एक नागरिक लिखित रूप से संभावित जनसुरक्षा संबंधी खतरे की जानकारी संबंधित अधिकारियों को दे चुका है, तो फिर मौके पर जाकर जांच कराने में इतनी देरी क्यों हो रही है?
अधिवक्ता दिनेश सिंह का कहना है कि जनता की सुरक्षा किसी भी प्रशासनिक प्रक्रिया से बड़ी जिम्मेदारी है। यदि शिकायत सही है तो कार्रवाई में देरी गंभीर परिणाम पैदा कर सकती है और यदि शिकायत में लगाए गए आरोप सही नहीं हैं तो भी इसका सबसे सरल और उचित रास्ता यही है कि सक्षम अधिकारी मौके पर पहुंचकर निष्पक्ष जांच करें और स्थिति को सार्वजनिक रूप से स्पष्ट करें। उनके अनुसार, जांच के बाद यदि सभी व्यवस्थाएं नियमों के अनुरूप पाई जाती हैं तो संबंधित प्रतिष्ठान के पक्ष में भी स्थिति स्पष्ट हो जाएगी, लेकिन यदि नियमों का उल्लंघन मिलता है तो तत्काल वैधानिक कार्रवाई होनी चाहिए।
उन्होंने Gas Cylinders Rules, 2016 तथा LPG के सुरक्षित भंडारण एवं संचालन से संबंधित अन्य लागू प्रावधानों के तहत गोदाम की जांच कराने की मांग की है। उन्होंने प्रशासन से यह भी पूछा है कि क्या गोदाम की वर्तमान स्थिति स्वीकृत नक्शे और लाइसेंस की शर्तों के अनुरूप है, क्या अनुमत क्षमता के भीतर ही सिलेंडरों का भंडारण किया जा रहा है, क्या पर्याप्त अग्निशमन उपकरण उपलब्ध हैं, क्या आपातकालीन स्थिति से निपटने की व्यवस्था है और क्या आसपास की आबादी को ध्यान में रखते हुए सभी निर्धारित सुरक्षा मानकों का पालन किया जा रहा है।
अधिवक्ता दिनेश सिंह ने जिलाधिकारी से मांग की है कि संबंधित विभागों के सक्षम अधिकारियों की संयुक्त टीम बनाकर समृद्धि गैस एजेंसी के LPG गोदाम का तत्काल स्थलीय निरीक्षण कराया जाए। गोदाम के लाइसेंस, NOC, अनुमतियां, भंडारण क्षमता और सुरक्षा व्यवस्थाओं की जांच की जाए तथा यदि कोई अनियमितता अथवा सुरक्षा मानकों का उल्लंघन पाया जाता है तो नियमों के अनुसार कठोर कार्रवाई की जाए। उन्होंने यह भी मांग की है कि यदि वर्तमान स्थान LPG गोदाम के लिए नियमानुकूल एवं सुरक्षित नहीं पाया जाता है तो इसे सुरक्षित गैर-आवासीय क्षेत्र में स्थानांतरित करने की कार्रवाई की जाए।
अधिवक्ता दिनेश सिंह ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि “जनता को संभावित खतरे के बीच छोड़कर किसी हादसे का इंतजार करना प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं हो सकती।” उनका कहना है कि प्रशासन को शिकायत को केवल कागजी कार्रवाई तक सीमित न रखकर मौके पर पहुंचकर वास्तविक स्थिति देखनी चाहिए। यदि सब कुछ नियमों के अनुरूप है तो प्रशासन जांच के माध्यम से स्थिति साफ करे और यदि कोई कमी है तो उसे तत्काल दूर कराया जाए।
उन्होंने कहा कि यह मामला किसी एक व्यक्ति की शिकायत भर नहीं है, बल्कि आवासीय क्षेत्र में रहने वाले आम नागरिकों की सुरक्षा और उनके जीवन से जुड़ा जनहित का प्रश्न है। ऐसे मामलों में प्रशासन की जिम्मेदारी केवल घटना होने के बाद राहत पहुंचाने तक सीमित नहीं हो सकती। संभावित खतरे की सूचना मिलने के बाद समय रहते उसका परीक्षण और निवारण करना भी प्रशासनिक दायित्व का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
अधिवक्ता दिनेश सिंह ने जिलाधिकारी से मांग की है कि मामले को गंभीरता से लेते हुए तत्काल जांच कराई जाए और जांच की कार्रवाई एवं उसके परिणाम से शिकायतकर्ता को भी अवगत कराया जाए, ताकि “हादसे के बाद जांच” की बजाय “हादसे से पहले सुरक्षा” की नीति को प्राथमिकता मिल सके।
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