अखिलेश यादव की गिरफ्तारी के विरोध में सपा नेताओं ने फूंका ज्ञानेश कुमार का पुतला
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Published - 06 October 2026 65 views
अखिलेश यादव की गिरफ्तारी के विरोध में सपा नेताओं ने फूंका ज्ञानेश कुमार का पुतला
नेशनल न्यूज 1 रायबरेली सलोन तहसील रिपोर्ट सन्नो विश्वकर्मा
रायबरेली। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को दिल्ली में निर्वाचन आयोग के खिलाफ विरोध-प्रदर्शन के दौरान हिरासत में लिए जाने के विरोध में रायबरेली में समाजवादी पार्टी के नेताओं एवं कार्यकर्ताओं में भारी आक्रोश देखने को मिला। आक्रोशित सपा नेताओं ने शहीद चौक पर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का पुतला फूंककर विरोध दर्ज कराया और केंद्र सरकार तथा निर्वाचन आयोग के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।
इस दौरान सपा नेता अखिलेश माही, राहुल निर्मल बागी, नीलेश यादव, हेमंत कुशवाहा, बबलू यादव, केडी यादव, ऋषभ सेन, प्रवीण यादव समेत करीब एक दर्जन समाजवादी पार्टी नेताओं ने विरोध प्रदर्शन किया।
सपा नेता अखिलेश माही ने कहा कि दिल्ली में लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखने और मतदाता सूची से जुड़े गंभीर सवाल उठाने पहुंचे समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव को हिरासत में लेना लोकतांत्रिक अधिकारों को दबाने का प्रयास है। उन्होंने कहा कि विपक्ष लगातार मतदाता सूची के पुनरीक्षण और वोटरों के नाम हटाए जाने को लेकर सवाल उठा रहा है। मंगलवार को दिल्ली में INDIA ब्लॉक के मार्च के दौरान अखिलेश यादव सहित कई विपक्षी नेताओं को पुलिस ने हिरासत में लिया।
अखिलेश माही ने आरोप लगाया कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर निर्वाचन प्रक्रिया और मतदाता सूची को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं तथा विपक्ष इन सवालों का जवाब मांग रहा है। उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी का आरोप है कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण की प्रक्रिया में बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम प्रभावित हुए हैं और इसमें पीडीए वर्ग के मतदाताओं को लेकर विशेष चिंता है। इन आरोपों को लेकर विपक्ष ने निर्वाचन आयोग से पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग की है।
उन्होंने तीखे शब्दों में कहा, "समाजवादी पार्टी का आरोप है कि ज्ञानेश कुमार भाजपा और सरकार के दबाव में काम कर रहे हैं। जिन सवालों का जवाब निर्वाचन आयोग को लोकतांत्रिक तरीके से देना चाहिए, उन सवालों के जवाब देने के बजाय विपक्षी नेताओं को हिरासत में लेना बेहद गंभीर और निंदनीय है।"
उन्होंने कहा कि "अखिलेश यादव पीडीए की आवाज को बुलंद करने और मताधिकार की रक्षा के लिए सड़क पर उतरे हैं। उनके शांतिपूर्ण लोकतांत्रिक विरोध को दबाने की कोशिश किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं की जाएगी। सत्ता के दबाव में लोकतंत्र की आवाज को कुचला नहीं जा सकता।"
सपा नेताओं ने कहा कि यदि मतदाता सूची में गड़बड़ी या बड़े पैमाने पर नाम हटाए जाने के आरोपों पर विपक्ष सवाल उठा रहा है तो निर्वाचन आयोग को खुले मंच पर जवाब देना चाहिए, न कि विरोध करने वालों को हिरासत में लेकर उनकी आवाज दबाने का प्रयास करना चाहिए। अखिलेश यादव ने भी दिल्ली के प्रदर्शन के दौरान निर्वाचन आयोग से मतदाता सूची संबंधी आरोपों पर जवाब देने की मांग की थी।
अखिलेश माही ने कहा कि "यह लड़ाई किसी एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि देश के प्रत्येक मतदाता के मताधिकार और लोकतांत्रिक अधिकारों की लड़ाई है। समाजवादी पार्टी लोकतांत्रिक एवं संवैधानिक तरीके से इस मुद्दे को जनता के बीच ले जाएगी।"
उन्होंने अखिलेश यादव सहित हिरासत में लिए गए सभी विपक्षी नेताओं को तत्काल रिहा करने की मांग की। उन्होंने चेतावनी दी कि "सरकार और निर्वाचन आयोग को यह समझ लेना चाहिए कि लोकतंत्र में सवाल पूछने वाली आवाज को पुलिस की ताकत से दबाया नहीं जा सकता। यदि लोकतांत्रिक आवाज को इसी तरह दबाने का प्रयास जारी रहा तो समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ता संवैधानिक दायरे में रहकर व्यापक जनआंदोलन के लिए मजबूर होंगे।"
सपा नेताओं ने कहा कि देश की जनता पूरे घटनाक्रम को देख रही है और मतदाता सूची से जुड़े हर सवाल का पारदर्शी जवाब चाहती है। उन्होंने निर्वाचन आयोग से निष्पक्षता, पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की मांग करते हुए अखिलेश यादव की हिरासत की कड़ी निंदा की।
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